जनता से दूर होता उत्सव — रजत जयंती पर सत्ता, नौकरशाही और असंवेदनशीलता की तस्वीरें उभरीं
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2025 का समापन हो गया है। आयोजन स्थल से लेकर जिलों तक अब सब दुकानें समेट ली गई हैं — लेकिन पीछे छोड़ गई हैं कई सवाल, विवाद और निराशाजनक तस्वीरें। रजत जयंती वर्ष में आयोजित यह राज्योत्सव आम जनता के उत्सव से ज्यादा सत्ता और नौकरशाही की औपचारिकता बनकर रह गया।
आयोजन का उद्देश्य था — राज्य की उपलब्धियों, संस्कृति और जनता की सहभागिता का जश्न। लेकिन नतीजा यह हुआ कि प्रदेशभर में विवाद, अव्यवस्था और असंवेदनशीलता की खबरें ही सुर्खियों में रहीं।
बेमेतरा में कलेक्टर और पार्षदों में भिड़ंत
बेमेतरा जिले में राज्योत्सव के दौरान बड़ा विवाद हो गया। बताया गया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने के लिए नगर पालिका के पार्षद मंच के सामने सोफा पर बैठे थे, तभी कलेक्टर रणवीर शर्मा ने उन्हें पीछे जाकर बैठने को कहा।
इस बात पर पार्षदों ने विरोध शुरू कर दिया और मौके पर ही हंगामा मच गया। देर रात तक भाजपा कार्यकर्ताओं और कलेक्टर के बीच तीखी बहस हुई।
विपक्ष ने इस घटना को लेकर सरकार पर तंज कसते हुए कहा —
“जब अपने ही नेताओं और जनप्रतिनिधियों का सम्मान नहीं हो पा रहा, तो आम जनता का क्या होगा?”
सरगुजा में मंत्री का भद्दा मजाक, रक्तदाता ने लौटाया सम्मान
सरगुजा में राज्योत्सव के दौरान कृषि मंत्री ने एक रक्तदाता को सम्मान के लिए मंच पर बुलाया, लेकिन वहीं मंच से मजाक कर दिया। अपमानित रक्तदाता ने प्रशस्ति पत्र प्रशासन को लौटा दिया।स्थानीय लोगों ने कहा कि प्रशासन और मंत्री की यह असंवेदनशीलता यह दिखाती है कि अब सम्मान सिर्फ औपचारिकता रह गया है।
कवर्धा में भाजपा कार्यकर्ता और पुलिस में झड़प
कवर्धा में राज्योत्सव के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच भिड़ंत हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि कार्यक्रम में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सूरजपुर में विधायक भूल गए राज्य गठन का वर्ष
सूरजपुर जिले में स्थानीय विधायक भूलन सिंह ने मंच से कहा कि “छत्तीसगढ़ राज्य का गठन वर्ष 2002 में हुआ था”, जबकि वास्तविक वर्ष 2000 है।
विधानसभा स्तर के नेता द्वारा ऐसी गलती ने आयोजकों की तैयारी और जागरूकता पर सवाल खड़े कर दिए।
कोरिया में मंत्री नदारद, बिहार के कार्यक्रम में व्यस्त
कोरिया जिले में आयोजित समापन समारोह में मंत्री राजेश अग्रवाल का घंटों इंतजार होता रहा, लेकिन वे नहीं पहुंचे। जानकारी के मुताबिक, मंत्री बिहार के कार्यक्रम में व्यस्त थे। स्थानीय लोगों ने इसे प्रदेश के प्रति उदासीनता बताया।
राजनांदगांव में ‘लखपति दीदियों’ का अपमान
राजनांदगांव जिले में बिहान योजना के तहत आत्मनिर्भर बनी ‘लखपति दीदियों’ का सम्मान उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के हाथों होना था।
पर इन महिलाओं को सम्मान स्थल तक कचरा गाड़ी में लाया गया, जिससे लोग आक्रोशित हो गए।
विडंबना यह रही कि इस अमानवीय व्यवहार पर न तो किसी अधिकारी को नोटिस मिला, न ही कोई कार्रवाई हुई।
कोरबा में नेताओं के कटआउट को ले जाया गया पशु ट्रॉली में
कोरबा जिले में राज्योत्सव स्थल पर नेताओं के कटआउट (मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, श्रम मंत्री आदि) को पशु ट्रॉली में ले जाया गया। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया।
लोगों ने कहा —
“जिंदा ‘लखपति दीदियों’ को कचरा गाड़ी में ले जाया गया, उस पर कोई कार्रवाई नहीं — लेकिन नेताओं के कटआउट के लिए तुरंत नोटिस भेज दिए गए।”
ट्रेन हादसे के दिन मंत्री मंच पर गाते दिखे
4 नवंबर को बिलासपुर के पास कोरबा से बिलासपुर आ रही मेमो पैसेंजर ट्रेन हादसे का शिकार हुई थी, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई।
उसी दिन, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा जांजगीर-चांपा के शिवरीनारायण में राज्योत्सव के मंच पर गाना गाते दिखे।
वीडियो वायरल होने के बाद विपक्ष ने इसे बेहद असंवेदनशील बताया।
जनता से कटता उत्सव
राज्योत्सव का यह रजत जयंती वर्ष, जनता की भागीदारी से नहीं बल्कि सत्ता, दिखावे और अफसरशाही के नियंत्रण में बीता।
अधिकांश जिलों में कार्यक्रम स्थल पर कुर्सियाँ खाली रहीं, कई जगह अधिकारियों को दर्शक जुटाने की जिम्मेदारी दी गई।
लोगों का कहना है कि अब यह आयोजन जन-उत्सव नहीं, बल्कि सत्ता-उत्सव बन चुका है।
सवाल बरकरार
आम जनता के नाम पर करोड़ों का खर्च, खाली कुर्सियाँ, और संवेदनशील मुद्दों पर नेताओं की चुप्पी — क्या यही है “राज्य की रजत जयंती” का जश्न?
जब जनता को न तो आमंत्रित किया गया, न ही जोड़ा गया, तो यह उत्सव आखिर किसके लिए था?
राज्योत्सव 2025 यह सवाल छोड़ गया है कि क्या अब जनता का राज्योत्सव सिर्फ सरकार की औपचारिकता बनकर रह गया है?
