3 बच्चों के बाद भी ले लिया ग्रीन कार्ड का फायदा? हेडमास्टर पर ठगी और सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप

RTI से खुला राज! उपसरपंच ने शिक्षा मंत्री से लेकर कलेक्टर तक भेजी शिकायत, वेतनवृद्धि और क्रमोन्नति पर उठे सवाल

सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक सरकारी शिक्षक पर शासकीय योजनाओं में कथित फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी कर लाभ लेने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासनिक महकमे तक हड़कंप मच गया है।

ग्राम पंचायत बगड़ा के उपसरपंच Dwarikadhish Tiwari ने शिक्षा मंत्री, कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी को शिकायत भेजकर प्रधान पाठक Kumeshwar Prasad Tiwari के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

RTI में खुला कथित खेल

शिकायतकर्ता के मुताबिक, Kumeshwar Prasad Tiwari वर्तमान में माध्यमिक शाला सोनगरा में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ हैं। आरोप है कि उन्होंने ग्रीन कार्ड और परिवार नियोजन योजना से मिलने वाले लाभों का कथित रूप से गलत तरीके से इस्तेमाल कर विशेष वेतनवृद्धि और क्रमोन्नति का फायदा लिया।

मामले की जानकारी मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज मांगे थे। आरोप है कि RTI में मिले रिकॉर्ड और सेवा पुस्तिका की प्रविष्टियों से यह संकेत मिला कि दो संतान होने के बाद परिवार नियोजन कराने का लाभ दिखाकर अतिरिक्त सुविधाएं ली गईं।

रिकॉर्ड में तीन संतानों का उल्लेख

शिकायत में दावा किया गया है कि सरकारी अभिलेखों के अनुसार शिक्षक की पहली संतान पुत्री माधुरी तिवारी का जन्म 22 अप्रैल 1986, दूसरी संतान आकाश कुमार तिवारी का जन्म 28 मई 1993 और तीसरी संतान विकास कुमार तिवारी का जन्म 28 सितंबर 1995 को हुआ।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि तीन संतानों के बावजूद दो संतान होने का लाभ लेकर ग्रीन कार्ड, दो विशेष वेतनवृद्धि और अन्य सुविधाएं हासिल की गईं।

“शासन के साथ ठगी” का आरोप

उपसरपंच Dwarikadhish Tiwari ने अपनी शिकायत में इसे शासन के साथ धोखाधड़ी और ठगी करार देते हुए संबंधित शिक्षक के खिलाफ FIR दर्ज करने, विभागीय कार्रवाई करने और कथित रूप से प्राप्त अवैध राशि की वसूली की मांग की है।

विभागीय जांच की मांग तेज

मामला अब शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन तक पहुंच चुका है। शिकायत की प्रतियां Gajendra Yadav, संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग, कलेक्टर सूरजपुर, जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी प्रतापपुर को भेजी गई हैं।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक जांच या कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिकायत सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में चर्चाएं तेज हो गई हैं।