रायपुर। नक्सलवाद के खात्मे को लेकर किए गए बड़े दावों के बीच अब सियासत भी गरमा गई है। एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर खुली चुनौती दे रहा है। बयानबाजी का यह दौर अब सीधा टकराव बनता नजर आ रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि बघेल जो आरोप लगा रहे हैं, वे पूरी तरह असत्य हैं और अपनी नाकामी छिपाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 में सरकार बनने के बाद ही नक्सल प्रभावित राज्यों की समीक्षा की गई थी, जिसमें यह सामने आया था कि 75 प्रतिशत से अधिक नक्सल गतिविधियां छत्तीसगढ़ में केंद्रित थीं।
सीएम साय ने कहा कि 31 मार्च का दिन राज्य के लिए ऐतिहासिक है और अब छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को देते हुए कहा कि उनके संकल्प के कारण ही यह संभव हो पाया है। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद राज्य के विकास में सबसे बड़ी बाधा था और अब बस्तर क्षेत्र तेजी से विकास की ओर बढ़ेगा।
वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर तीखा जवाब दिया है। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयान को गलत बताते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर खुली बहस के लिए तैयार हैं। बघेल ने कहा कि शाह को अपने बयान पर शर्म आनी चाहिए और उन्हें छत्तीसगढ़ की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम ने नक्सलवाद जैसे गंभीर मुद्दे को सियासी बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि यह टकराव आगे किस दिशा में जाता है और क्या इस मुद्दे पर कोई ठोस सहमति बन पाती है या फिर बयानबाजी का यह सिलसिला और तेज होगा।
