रायपुर। लंबे समय से भय और हिंसा का प्रतीक बना नक्सलवाद अब लगभग खत्म होने के दावे के साथ एक नई चर्चा शुरू हो गई है। लेकिन इस बड़े ऐलान के बीच कुछ ऐसे संकेत भी सामने आए हैं, जो यह बताने के लिए काफी हैं कि कहानी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
रायपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है और छत्तीसगढ़ ने नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी जीत हासिल कर ली है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में नक्सली संगठन का लगभग 99 प्रतिशत सफाया हो चुका है।
मंत्री शर्मा ने बताया कि वर्ष 2023 तक छत्तीसगढ़ में देश के करीब 75 प्रतिशत नक्सली सक्रिय थे और 90 प्रतिशत आर्म्स कैडर भी यहीं मौजूद था। इसके बावजूद अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने इस सफलता का श्रेय बस्तर की जनता, सुरक्षा बलों के पराक्रम और आधुनिक तकनीक आधारित इंटेलिजेंस को दिया।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान ऐसी रणनीति बनाई गई कि नक्सलियों को भारी नुकसान हुआ, जबकि सुरक्षा बलों के जवानों को कोई बड़ी क्षति नहीं पहुंची। यह समन्वय और सटीक योजना का परिणाम है।
गृहमंत्री ने यह भी कहा कि जब ये अभियान चल रहे थे, उस दौरान विपक्ष से सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन उल्टा आरोप लगाए गए। उन्होंने बताया कि कुछ नेताओं ने मुठभेड़ों को फर्जी बताया, जबकि नक्सलियों ने खुद पत्र जारी कर घटनाओं की पुष्टि की थी। बिना पूरी जानकारी के ऐसे आरोप लगाना जवानों के साहस पर सवाल उठाने जैसा है।
मंत्री शर्मा ने यह भी जानकारी दी कि नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर जैसे संवेदनशील इलाकों में समाज के प्रमुखों और जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार बैठकें की गईं। बस्तर के जनजातीय समाज ने भी इस अभियान में अहम भूमिका निभाई और कई नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अभी कुछ छोटे समूह कांकेर के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जिन पर नजर रखी जा रही है। कई नक्सली हथियार छोड़कर गांवों में सामान्य जीवन जी रहे हैं और सरकार अब भी पुनर्वास के लिए तैयार है।
इस बड़े दावे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वाकई नक्सलवाद का अंत हो चुका है, या फिर जंगलों में अब भी कुछ ऐसी हलचल बाकी है, जो आने वाले समय में फिर किसी बड़े घटनाक्रम का संकेत दे सकती है।
