धर्मांतरण पर बड़ा कानून! छत्तीसगढ़ में नया बिल पेश… क्या अब बदल जाएगा पूरा खेल?

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज विधानसभा के भीतर एक बड़ा और संवेदनशील कदम उठाया गया। राज्य सरकार ने ज़बरदस्ती, लालच या धोखाधड़ी से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पेश किया, जिससे सियासी और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

यह विधेयक उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सदन में पेश किया। उनके पास गृह विभाग की जिम्मेदारी भी है।

🔍 क्या है इस बिल में खास?

सरकार के मुताबिक, इस नए विधेयक का मकसद ज़बरदस्ती, लालच, अनुचित प्रभाव या गलत जानकारी देकर किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है। इसमें खास तौर पर आधुनिक तरीकों—जैसे डिजिटल और आर्थिक लालच—को भी शामिल किया गया है।

इसके अलावा, अप्रत्यक्ष धमकी या दबाव डालकर धर्म बदलवाने के मामलों को भी इस कानून के दायरे में लाने की तैयारी है।

📜 पुराने कानून का विस्तार

बताया जा रहा है कि यह विधेयक 1968 से लागू कानून का ही विस्तारित रूप है। फिलहाल राज्य में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968’ लागू है, जिसे राज्य गठन के बाद अपनाया गया था।

सरकार का दावा है कि इस नए कानून से एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार होगा, जिससे नागरिकों की संवैधानिक स्वतंत्रता भी सुरक्षित रहेगी और सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगेगी।

🔥 आगे क्या?

फिलहाल इस विधेयक पर विधानसभा में चर्चा बाकी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।