छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026 को लेकर विधानसभा में जोरदार सियासी टकराव देखने को मिला। उप-मुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने यह बिल सदन में पेश किया, लेकिन कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध जताया।
🚨 कांग्रेस की मांग—प्रवर समिति को भेजा जाए
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने इस विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में ऐसे बिल लंबित हैं, ऐसे में इस पर जल्दबाजी में चर्चा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस विधेयक को पहले विधानसभा की प्रवर समिति को भेजा जाए।
🔥 सदन में और भी गरमाया माहौल
शून्यकाल के दौरान कांग्रेस ने SIR को लेकर स्थगन प्रस्ताव भी लाया। चरणदास महंत ने दावा किया कि 19 लाख से ज्यादा लोग लापता हैं और उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि ये लोग आखिर कहां गए और इस पर कोई चिंता क्यों नहीं दिखाई जा रही।
📜 क्या है इस विधेयक में खास?
‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026’ का उद्देश्य जबरन या अवैध धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है।
इसमें निम्न प्रावधान शामिल हैं:
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जबरदस्ती, लालच, धोखे या दबाव से धर्म परिवर्तन अपराध माना जाएगा
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स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने पर जिला मजिस्ट्रेट को पहले सूचना देना अनिवार्य
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सामान्य मामलों में 7 से 10 साल तक की सजा
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महिलाओं, नाबालिगों और SC/ST मामलों में 10 से 20 साल तक की सजा
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सामूहिक धर्म परिवर्तन पर आजीवन कारावास तक का प्रावधान
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अपराध को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाया गया
🤔 आगे क्या होगा?
सरकार इसे धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे लेकर गंभीर आपत्तियां जता रहा है।
👉 अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह बिल सीधे पास होगा या पहले समिति में जाकर लंबी बहस का हिस्सा बनेगा… और क्या इससे प्रदेश की राजनीति में नया तूफान आएगा?
