सूरजपुर। जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला कलेक्टर रेना जमील के निर्देश और जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल के मार्गदर्शन में जिले के सभी उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, देवनगर में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों को बाल विवाह, बाल संरक्षण, साइबर अपराध और अन्य सामाजिक कानूनों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि बाल विवाह केवल सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह कराने, उसमें सहयोग करने या शामिल होने वाले किसी भी व्यक्ति को दो वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बालिकाओं का विवाह 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद ही करें और उससे पहले उन्हें शिक्षा एवं आत्मनिर्भर बनने का अवसर दें।
पॉक्सो कानून और साइबर अपराधों पर भी दी जानकारी
जायसवाल ने पॉक्सो अधिनियम, 2012 की जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, अनुचित स्पर्श, अश्लील इशारे, पीछा करना, अश्लील सामग्री दिखाना या रास्ता रोकना जैसे कृत्य गंभीर और गैर-जमानती अपराध हैं। उन्होंने छात्राओं से किसी भी अप्रिय घटना की जानकारी तुरंत माता-पिता, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों को देने की अपील की।
इसके साथ ही उन्होंने साइबर अपराधों को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का उपयोग अभिभावकों की निगरानी में करें तथा फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम सहित अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत जानकारी साझा करते समय विशेष सावधानी बरतें, ताकि ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों से बचा जा सके।
अंधविश्वास और नाबालिग वाहन चालकों पर भी चेतावनी
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया गया कि टोनही जैसी अवधारणाएं अंधविश्वास पर आधारित हैं और किसी को इस आधार पर प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है। विद्यार्थियों से वैज्ञानिक सोच अपनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया गया।
यातायात नियमों पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने कहा कि निर्धारित आयु और वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बिना वाहन चलाना कानून का उल्लंघन है। यदि नाबालिग द्वारा वाहन चलाने से दुर्घटना होती है, तो वाहन स्वामी और अभिभावकों के खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासन ने सभी अभिभावकों और विद्यार्थियों से सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूक होकर कानून का पालन करने और सुरक्षित एवं शिक्षित समाज के निर्माण में सहयोग देने की अपील की।
