लाइफस्टाइल/ऑटो। पेट्रोल या डीज़ल भरवाते समय कई लोगों के मन में शक और भ्रम होते हैं — खासकर जब नक़ली या मिलावटी ईंधन और मीटर छेड़छाड़ की चर्चा होती है। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो में एक पेट्रोल पंप कर्मचारी ने ऐसे ही झमेलों से बचने के दो आसान और प्रैक्टिकल नियम बताए हैं, जिन पर ध्यान देने से ग्राहक ठगे जाने से बच सकते हैं।
वीडियो में कर्मचारी ने समझाया कि कई लोग चालाकी से 110, 210 या 310 रुपये/लीटर का ऑर्डर दे देते हैं क्योंकि उनका मानना है कि इससे पंप पर चोरी नहीं होगी। मगर असलियत यह है कि ये संख्याएँ कुछ भी साबित नहीं करतीं। असली जांच मशीन पर दर्ज ‘घनत्व (Density)’ और मीटर रीडिंग से होती है — इन दोनों पर ध्यान देकर आप ईंधन की असल गुणवत्ता और मशीन की ईमानदारी का पता लगा सकते हैं।
कर्मचारी द्वारा बताए गए दो अहम बिंदु:
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घनत्व (Density) देखें — पेट्रोल के लिए मशीन पर लिखा घनत्व सामान्यतः 720 से 775 के बीच होना चाहिए; डीज़ल के लिए यह 820 से 860 के बीच मानक रहता है। घनत्व सीमा से बाहर होने पर शक करें — इससे मिलावट या घटिया ईंधन होने का संकेत मिलता है।
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मीटर की रीडिंग का पैटर्न देखें (सब 0 के बाद अगला अंक 5 होना चाहिए) — जब मीटर शुरू में सब 0 दिखाता है तो उसके अगले अंक पर 5 होना चाहिए; इसके बाद 2, 3, 4 वगैरह आते हैं। अगर मीटर 0 से कूदकर सीधे 10, 12 या 15 पर चला जाता है तो मशीन में छेड़छाड़ की संभावना रहती है और वास्तविक मात्रा कम दी जा रही होती है।
कर्मचारी ने स्पष्ट किया कि इसलिए 110/210/310 जैसे नंबर मांगने से फ़र्क़ नहीं पड़ता — असली भेद तो घनत्व और मीटर रीडिंग ही बताते हैं। उन्होंने ग्राहकों से सलाह दी कि पेट्रोल/डीज़ल भरवाते समय मशीन पर घनत्व व रीडिंग खुद देखकर ही भरोसा करें तथा शक होने पर पंप मैनेजर से स्पष्टीकरण मांगें।
विशेषतः ग्रामीण और छोटी दुकानों पर जहां निगरानी कम होती है, वहां ग्राहक यह दो बातें अपनाकर ठगे जाने की आशंका काफी घटा सकते हैं। साथ ही, नियमों के उल्लंघन या मिलावटी ईंधन की आशंका होने पर संबंधित पेट्रोल पंप का हिसाब-रफ़्तार नोट करें और आवश्यक होने पर उपभोक्ता फोरम या आयल कंपनी की हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएँ।
