देशभक्ति की मिसाल बने रंजीत, अंतिम यात्रा में उमड़ी भारी भीड़ और गूंजे ‘रंजीत अमर रहे’ के नारे
जगदलपुर: मणिपुर में हुए उग्रवादी हमले में बस्तर का लाल रंजीत सिंह कश्यप शहीद हो गए। आज उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा घरवालों के आंचल तक पहुंचा और पूरा गांव उनकी अंतिम यात्रा का गवाह बना। गलियों में गूंजे ‘रंजीत अमर रहे’ के नारों ने हर आंख में आंसू और हर दिल में गर्व के भाव भर दिए।
मंत्री केदार कश्यप, स्थानीय विधायक लखेश्वर बघेल, कलेक्टर हरीश एस और एसपी शलभ सिन्हा सहित प्रशासन और जनप्रतिनिधि भी गांव पहुंचे और शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
रंजीत अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और उनकी पत्नी और तीन बेटियां हैं। सबसे छोटी केवल चार महीने की मासूम है। 19 सितंबर को मणिपुर के विष्णुपुर जिले में 33 असम राइफल्स के काफिले पर हुए हमले में रंजीत ने अपने प्राणों की आहुति दी।
गांव वालों के अनुसार रंजीत बचपन से मिलनसार और मददगार थे। देश सेवा का जज्बा उनमें हमेशा से था। पिछले महीने ही घर आए थे और पत्नी से वादा किया था कि अगली छुट्टी में बेटी का नामकरण करेंगे। लेकिन आज वे तिरंगे में लिपटे लौटे, देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देकर।
रंजीत की वीरता और उनकी परिवार के प्रति भावनात्मक कहानी ने पूरे बस्तर को गर्व और गम के मिले-जुले भाव से भर दिया।
