PM मोदी के जन्मदिन पर सेवा पखवाड़ा: कैमरों के सामने सफाई, लेकिन अंबिकापुर की गंदगी क्यों नहीं हटती?

अम्बिकापुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75वां जन्मदिन पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाया गया। सोशल मीडिया पर बधाई संदेश और तस्वीरें छाई रहीं, वहीं अखबारों में भी बड़े-बड़े विज्ञापन छपे। सवाल यह उठता है कि क्या इस खर्च से हजारों स्कूल और अस्पताल बनाए जा सकते थे? क्या जन्मदिन को सादगी से भी नहीं मनाया जा सकता, जैसा कि कभी लालबहादुर शास्त्री जी मनाते थे?

‘सेवा पखवाड़ा’ का ऐलान
भाजपा ने इस मौके पर 15 दिन का ‘सेवा पखवाड़ा’ शुरू किया है, जो 2 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता अभियान, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाले मेले और बुद्धिजीवियों के कार्यक्रम तक शामिल हैं। प्रदेश में भी जगह-जगह भाजपा नेता, मंत्री और विधायक हाथों में झाड़ू लेकर सड़कों पर सफाई करते नजर आए। तस्वीरें और वीडियो कैमरों पर खूब चमके।

अंबिकापुर की सच्चाई
लेकिन जमीनी हकीकत तस्वीरों से बिल्कुल अलग है। अंबिकापुर नगर निगम की दीवारें पान-गुटखे की पीक से सनी पड़ी हैं, मानो स्वच्छ भारत मिशन का मज़ाक उड़ाया जा रहा हो। सरगुजा का कम्पोज़िट बिल्डिंग — जहां बड़े प्रशासनिक फैसले लिए जाते हैं — वहां कीचड़ और पेशाब की बदबू लोगों को नाक पर रूमाल रखकर गुजरने को मजबूर कर देती है।

जिला अस्पताल की हालत और भी दयनीय है। मरीज और उनके परिजन गंदगी, कचरे और अव्यवस्था के बीच मजबूरन इलाज कराने आते हैं। सफाईकर्मी केवल विशेष अवसरों पर ही याद किए जाते हैं, बाकी समय अस्पताल की तस्वीर भयावह रहती है।

दिखावा या असली सेवा?
ऐसे में सवाल उठता है — क्या ‘सेवा पखवाड़ा’ जनता के जीवन को वास्तव में बदल रहा है या सिर्फ़ नेताओं की फोटो खिंचवाने और अखबारों की सुर्खियां बनाने का जरिया है?

क्या सरकारी दफ्तरों की दीवारों पर पान-गुटखे की थूक बंद होगी?

क्या अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर स्थायी सफाई व्यवस्था होगी?

क्या जनता गंदगी और बदबू में जीने को मजबूर रहेगी, जबकि नेता कैमरों में चमकते रहेंगे?

अगर सेवा पखवाड़ा सचमुच जनता के लिए है, तो असर सड़कों, अस्पतालों और दफ्तरों में साफ दिखना चाहिए। अन्यथा यह केवल दिखावे की राजनीति बनकर रह जाएगा।

खैर, तमाम सवालों के बीच हमारी टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं देती है।