मिड-डे मील में बड़ा बदलाव: अब स्टील के बर्तन में बनेगा खाना, बच्चों की थाली भी होगी स्टेनलेस स्टील की

नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों के बच्चों के मिड-डे मील (Mid Day Meal) को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब तक परिषदीय विद्यालयों में भोजन बनाने और परोसने के लिए एल्युमिनियम के बर्तन इस्तेमाल किए जाते थे, लेकिन स्वास्थ्य पर इसके दुष्प्रभावों को देखते हुए अब इसे पूरी तरह से बंद किया जा रहा है।

अब सभी विद्यालयों में मिड-डे मील स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) के बर्तनों में पकाया और परोसा जाएगा। बच्चों को भी स्टील की थालियों में ही भोजन मिलेगा। इसके लिए विभाग की ओर से विद्यालयों को धनराशि भेजी जा रही है ताकि वे तुरंत स्टील के बर्तन खरीद सकें।

 क्यों लिया गया यह फैसला?

चिकित्सकों के अनुसार, एल्युमिनियम के बर्तन सेहत के लिए बेहद हानिकारक होते हैं। खाना पकाने के दौरान एल्युमिनियम, आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों को सोख लेता है। जब यह शरीर में पहुंचता है तो धीरे-धीरे हड्डियों को कमजोर करता है और कई बीमारियों का कारण बन सकता है।

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. अजय गुप्ता का कहना है कि एल्युमिनियम से बने भोजन के लगातार सेवन से

  • ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना),

  • आंखों की बीमारियां,

  • पेट से जुड़ी दिक्कतें (अतिसार, अम्लता, डकार, दर्द),

  • एक्जिमा जैसे त्वचा रोग
    हो सकते हैं।

 कितने बच्चों को मिलेगा फायदा?

जिले के 1143 परिषदीय स्कूलों में करीब 1.99 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इन्हें दोपहर के समय मिड-डे मील दिया जाता है। अब इन सभी बच्चों को स्टेनलेस स्टील के बर्तनों में तैयार पौष्टिक भोजन मिलेगा।

 बच्चों की सेहत पर सीधा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बच्चों की सेहत के लिए बेहद कारगर साबित होगा। लंबे समय में स्टेनलेस स्टील बर्तनों का उपयोग न सिर्फ बच्चों को बीमारियों से बचाएगा, बल्कि उनके भोजन के पोषण स्तर को भी बनाए रखेगा। बेसिक शिक्षा विभाग का यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल माना जा रहा है।