सूरजपुर: छत्तीसगढ़ में धान की कुछ प्रजातियों को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा होता दिखाई दे रहा है। सूरजपुर जिले के किसानों ने कृषि विभाग को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि प्रदेश में कथित रूप से प्रतिबंधित और “खाने योग्य नहीं” मानी जाने वाली धान की किस्मों की खुलेआम बिक्री हो रही है।
किसानों ने दावा किया है कि बीबी-11 और पान-2423 समेत कई मोटे धान की प्रजातियां बाजार में धड़ल्ले से बेची जा रही हैं, जबकि इनका उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया जा रहा है।
शिकायत में कहा गया है कि बीबी-11 धान को “जमुना” नाम से बाजार में बेचा जा रहा है। इसके अलावा पान-2423, अराइज बोल्ड, सेतु गरुना, वीएनआर, भीम-115, अडवांटा-837, यूएस-362, कावेरी-468 और यूएस-321 जैसी हाईब्रिड किस्में भी बड़े पैमाने पर बोई और बेची जा रही हैं।
किसानों का आरोप है कि इन धानों का उत्पादन सामान्य किस्मों की तुलना में लगभग दोगुना होता है, इसी वजह से इनकी बिक्री तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, शिकायतकर्ताओं ने इन्हें “बेहद मोटा” और “खाने योग्य नहीं” बताया है।
सूरजपुर जिले के उचडीह गांव के किसानों ने Agriculture Department Chhattisgarh और कृषि मंत्री Ramvichar Netam को ज्ञापन भेजकर मांग की है कि ऐसे धानों की बिक्री और रोपाई पर रोक लगाई जाए।
किसानों ने कहा कि सरकार केवल पतले और खाने योग्य धान जैसे IR-64 और 1010 जैसी प्रजातियों को ही अनुमति दे, ताकि लोगों को बेहतर गुणवत्ता का चावल मिल सके और किसानों का खर्च भी कम हो।
शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि मोटे धान की इन किस्मों का सेवन स्वास्थ्य के लिहाज से नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि, शिकायत में इस संबंध में कोई वैज्ञानिक रिपोर्ट या आधिकारिक प्रतिबंध आदेश संलग्न नहीं किया गया है।
अब यह मामला कृषि विभाग तक पहुंच चुका है। किसानों की शिकायत के बाद विभाग इस विषय में क्या फैसला लेता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।