रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का 11वां दिन उस समय बेहद हंगामेदार हो गया, जब बीजापुर के गंगालूर स्थित पोटा केबिन छात्रावास में पढ़ने वाली तीन छात्राओं के गर्भवती मिलने का मामला सदन में गूंज उठा। विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला।
मामले पर सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब दिया, लेकिन मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
मंत्री के जवाब से भड़का विपक्ष
सदन में उठे सवालों के जवाब में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि तीनों छात्राएं पिछले साल दिवाली के दौरान अपने घर गई थीं और उसी समय से वे घर से ही आना-जाना कर पढ़ाई कर रही थीं।
मंत्री का यह जवाब सुनते ही विपक्षी नेताओं ने कड़ा विरोध जताया और सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सदन में जोरदार हंगामा शुरू कर दिया।
दो छात्राएं नाबालिग, करीब पांच महीने का गर्भ
जानकारी के मुताबिक गंगालूर पोटा केबिन छात्रावास की तीन छात्राएं गर्भवती पाई गई हैं। इनमें से दो छात्राएं नाबालिग बताई जा रही हैं और उनका गर्भ करीब पांच महीने का बताया गया है।
इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग को पहले से थी जानकारी?
बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन छात्राओं के लिए गर्भवती कार्ड भी बनाया गया था। इससे संकेत मिलता है कि स्वास्थ्य विभाग को इस स्थिति की जानकारी थी और उनके स्वास्थ्य से जुड़ी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी।
हालांकि मामला सामने आने के बाद छात्रावास की अधीक्षिका ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उनके इस बयान के बाद पूरे मामले को लेकर और भी सवाल उठने लगे हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
छात्रावास में पढ़ने वाली छात्राओं के गर्भवती होने की इस घटना ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक तौर पर भी यह मामला गर्माता नजर आ रहा है। हाल ही में अफीम की खेती के मुद्दे के बाद अब विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए एक और बड़ा मुद्दा मिल गया है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस संवेदनशील मामले में आगे क्या कदम उठाती है।
