बलात्कार के आरोपी डॉक्टर की FIR रद्द करने की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बलात्कार के आरोपी एमएस ऑर्थोपेडिक सर्जन विजय उमाकांत वाघमारे (33) की एफआईआर, आरोपपत्र और संज्ञान आदेश रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में प्रारंभिक स्तर पर हस्तक्षेप केवल अत्यंत सीमित परिस्थितियों में ही संभव है।


मामला संक्षेप में

  • याचिकाकर्ता विजय उमाकांत वाघमारे पर वर्ष 2018 में दुर्ग जिले के भिलाई नगर थाने में बलात्कार का आरोप दर्ज हुआ था।

  • आरोप है कि उन्होंने विवाह का झांसा देकर शिकायतकर्ता के साथ दो बार शारीरिक संबंध बनाए।

  • जांच के बाद 3 अक्टूबर 2025 को आरोपपत्र पेश किया गया और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने संज्ञान लिया।

याचिकाकर्ता का तर्क

  • घटना के समय वे पुणे के ससून जनरल अस्पताल में तैनात थे, और उपस्थिति रजिस्टर से उनकी मौजूदगी साबित होती है।

  • प्राथमिकी दर्ज करने में 19 माह की देरी, सहमति और शिकायतकर्ता द्वारा विवाह के लिए दबाव के मुद्दे उठाए गए।

न्यायालय का रुख

  • मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि ऐसे प्रारंभिक चरण में साक्ष्यों का मूल्यांकन या ‘मिनी ट्रायल’ नहीं किया जा सकता।

  • एलिबाई, सहमति, देरी और झूठे फंसाए जाने के दावे विचारण के दौरान साक्ष्यों के आधार पर देखे जाएंगे।

  • उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया अपराध का संकेत मिलता है, इसलिए याचिका खारिज कर दी गई।