Bastar Villagers Angry: बस्तर में उबाल पर गुस्सा! 33 गांवों के सरपंच सड़क पर उतरे, नेशनल हाईवे किया जाम—एक घंटे तक थमी ज़िंदगी

 पंद्रहवें वित्त की राशि नहीं मिली तो ठप पड़ गया विकास, पानी-सड़क-बिजली सब ठहर गया… ग्रामीणों की चेतावनी ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता

जगदलपुर:बस्तर में शुक्रवार को ग्रामीण आक्रोश फूट पड़ा। 33 गांवों के सरपंच और ग्रामीण एकजुट होकर किलेपाल में नेशनल हाईवे पर चक्का जाम करने उतर आए। पंद्रहवें वित्त की राशि लंबे समय से जारी नहीं होने से नाराज़ ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। करीब एक घंटे तक चले जाम से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई।

 गांवों में विकास पूरी तरह ठप, बुनियादी सुविधाएं बेहाल

सरपंचों का कहना है कि पिछले एक साल से जनपद पंचायत के माध्यम से विकास कार्यों की राशि नहीं मिली। नतीजा—

  • नालियों की मरम्मत अटकी

  • बिजली से जुड़ी समस्याएं बढ़ीं

  • सड़क निर्माण रुका

  • पेयजल संकट गहराया

ग्रामीणों के मुताबिक, बिना बजट के गांवों का पहिया जाम हो चुका है और रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रहीं।

 पंद्रहवें वित्त का पैसा नहीं मिला, अमृत जल मिशन भी रुका

सरपंच संघ के अध्यक्ष ने साफ कहा कि पंद्रहवें वित्त की राशि न मिलने से अमृत जल मिशन तक ठप पड़ा है।
बोरिंग से लेकर सड़कों पर मुरूम डालने तक के लिए पंचायतों के पास एक रुपया भी नहीं। कई बार कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दी गई, मगर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई—यही वजह है कि गुस्सा सड़कों पर दिखा।

 राजनीतिक समर्थन और चेतावनी

इस चक्का जाम को कांग्रेस ने भी समर्थन दिया और इसे ग्रामीण विकास के साथ अन्याय बताया।
सरपंचों की दो-टूक चेतावनी है—जब तक लंबित राशि जारी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।