बिलासपुर: बकाया बिजली बिल वसूली को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस बीडी गुरु ने स्पष्ट किया कि विद्युत (प्रदाय) अधिनियम, 1948 की धारा 49 के तहत नए मालिक को किसी संपत्ति पर पुराने मालिक का बकाया बिजली बिल चुकाना अनिवार्य है।
यह मामला पॉलीबॉन्ड रॉक फाइबर प्राइवेट लिमिटेड और अरिहंत रॉक वूल फाइबर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा था। अरिहंत कंपनी की संपत्ति पर बैंक ने ऋण न लौटाने पर कब्जा कर लिया था और 19 अप्रैल 2012 को नीलामी की गई। याचिकाकर्ता कंपनी ने 2.62 करोड़ रुपये देकर संपत्ति खरीदी।
संपत्ति का विक्रय प्रमाण पत्र याचिकाकर्ता को सौंपते समय लिखा गया था कि संपत्ति “सभी बंधनों से मुक्त” है। इसके बावजूद जब याचिकाकर्ता ने CSPDCL से बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया, तो पता चला कि पुराने मालिक के 2008 से बिजली बिल बकाया हैं। बिजली कंपनी ने याचिकाकर्ता से ₹17,67,873 का भुगतान करने को कहा।
याचिकाकर्ता ने इस राशि का भुगतान कर दिया और रिफंड की मांग के लिए हाईकोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह वसूली अवैध और मनमानी थी, जबकि बिजली कंपनी और बैंक ने दावा किया कि नीलामी के समय संपत्ति “जैसा है जहां है” आधार पर बेची गई थी, यानी सभी बकाया और देनदारियां खरीदार की जिम्मेदारी हैं।
हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया:
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संपत्ति नीलामी में “जैसा है जहां है” आधार शामिल है, इसलिए पुराने मालिक का बकाया नया मालिक चुकाएगा।
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बिजली कंपनी द्वारा बकाया वसूली सही और वैध है।
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खरीदार को संपत्ति खरीदने से पहले सभी बकाया और देनदारियों की जाँच करनी चाहिए।
