जहां देशभर में जलता है रावण, वहीं इन जगहों पर मनाया जाता है उसका श्राद्ध… वजह जानकर रह जाएंगे हैरान!

दशहरे का नाम आते ही आपके जेहन में सबसे पहले रावण दहन, मेले और आतिशबाज़ी की तस्वीर आती होगी। यह दिन भगवान राम की रावण पर विजय का प्रतीक माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ऐसे स्थान भी हैं जहां रावण दहन नहीं होता, बल्कि उसकी मृत्यु का शोक मनाया जाता है? जी हां, यहां दशहरे पर रावण को “खलनायक” नहीं बल्कि “वीर योद्धा” और “भगवान शिव का परम भक्त” मानकर उसकी पूजा की जाती है।

आइए जानते हैं वो जगहें जहां दशहरा का रंग बाकी देश से बिल्कुल अलग होता है—

  • मध्यप्रदेश का नटेरन (विदिशा):
    यहां दशहरे के दिन रावण की बरसी मनाई जाती है। मान्यता है कि यह गांव रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका है, इसलिए यहां लोग रावण को अपना दामाद मानते हैं।

  • कानपुर (दशानन मंदिर):
    कानपुर के शिवाला इलाके में दशानन मंदिर है, जो सालभर बंद रहता है और केवल दशहरे के दिन ही खुलता है। इस दिन रावण की मूर्ति का दूध से अभिषेक कर पूजा की जाती है।

  • राजस्थान (जोधपुर का मंदोदरी स्थान):
    जोधपुर में एक जगह है जहां कहा जाता है कि रावण और मंदोदरी का विवाह हुआ था। यहां रावण का मंदिर भी मौजूद है।

  • कर्नाटक (मंडया और कोलार):
    इन जिलों में दशहरे पर रावण दहन नहीं किया जाता। यहां रावण को शिवभक्त मानकर पूजा की जाती है।

  • आंध्रप्रदेश (काकिनाडा):
    यहां रावण का एक मंदिर है जहां लोग उसे “शक्तिसम्राट” मानते हैं। रामभक्त भी इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं।

  • मध्यप्रदेश का मंदसौर:
    यहां दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि यह स्थान रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था।