जब समाज बना बेटी का सहारा… ‘अनोखी सोच’ ने कराई गरीब लड़की की शादी, मिसाल बन गया यह विवाह

अंबिकापुर में वन देवी मंदिर में सामाजिक रीति-रिवाज से हुआ विवाह, संस्था ने उठाया पूरी शादी का जिम्मा

अंबिकापुर। शहर की सामाजिक संस्था अनोखी सोच ने एक बार फिर मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटी की शादी का पूरा जिम्मा उठाकर संस्था ने समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।

संस्था ने बिहार के औरंगाबाद जिले की रहने वाली एक युवती की शादी कराने का बीड़ा उठाया और अंबिकापुर स्थित वन देवी मंदिर में सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न कराया। इस विवाह की पूरी व्यवस्था अनोखी सोच संस्था के सदस्यों ने मिलकर की।

आम तौर पर शादियों में ढोल-नगाड़ों के साथ बारात, नाचते-गाते बाराती और भव्य स्वागत देखने को मिलता है, लेकिन अंबिकापुर में हुई यह शादी अपनी खास वजह से चर्चा का विषय बन गई। यहां शादी का आयोजन सादगी के साथ किया गया, लेकिन इसमें सामाजिक सहयोग और मानवता की झलक साफ दिखाई दी।

इस विवाह समारोह में शहर के कई गणमान्य नागरिक भी शामिल हुए। सभी ने वर-वधु को आशीर्वाद देते हुए उपहार भेंट किए और नवदंपति के सुखद भविष्य की कामना की।

संस्था की ओर से बारातियों और मेहमानों के स्वागत, भोजन और अन्य सभी व्यवस्थाएं भी की गईं। पूरे सामाजिक रीति-रिवाज और परंपराओं के साथ संपन्न हुई इस शादी ने यह साबित कर दिया कि सामूहिक प्रयास से किसी जरूरतमंद परिवार की बड़ी जिम्मेदारी भी आसानी से निभाई जा सकती है।

अनोखी सोच संस्था के इस सराहनीय कदम की पूरे जिले में प्रशंसा हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे प्रयास समाज में सहयोग, संवेदनशीलता और मानवता की भावना को और मजबूत करते हैं।