महासमुंद।
ऐतिहासिक और पुरातात्विक नगरी सिरपुर में चल रहे तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव के द्वितीय दिवस ने संगीत और संस्कृति की ऐसी तस्वीर पेश की, जिसने हर मौजूद शख्स को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैसे-जैसे शाम ढली, वैसे-वैसे सुरों की गूंज और तालियों की आवाज़ ने पूरे महोत्सव परिसर को जगा दिया।
दिनभर से लेकर देर रात तक चले कार्यक्रमों में शास्त्रीय, सूफी, भक्ति, लोक और आधुनिक संगीत का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने सिरपुर की ऐतिहासिक पहचान को सांस्कृतिक रंगों से और भी गहराई दे दी।
लोक परंपराओं से हुई शुरुआत, तालियों से गूंजा परिसर
द्वितीय दिवस के कार्यक्रमों की शुरुआत छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, लोकगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों से हुई। कलाकारों की लयबद्ध प्रस्तुति और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने दर्शकों को बांधे रखा। हर ताल पर तालियां गूंज उठीं और माहौल उत्साह, उल्लास व आनंद से भर गया।
दिनभर चले सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने यह साबित कर दिया कि सिरपुर केवल इतिहास नहीं, बल्कि जीवंत संस्कृति का प्रतीक भी है।
रात होते ही बदला माहौल, मंच पर छा गए इंडियन आइडल फेम कलाकार
महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण रहा रात्रि सत्र, जब मंच पर उतरे इंडियन आइडल फेम कलाकार। रात 8 बजे से 10 बजे तक चले इस संगीतमय कार्यक्रम में—
नितिन कुमार (इंडियन आइडल सीजन 10)
नचिकेत लेले (इंडियन आइडल सीजन 12)
वैशाली रायकवार
ने अपनी सशक्त, मधुर और भावपूर्ण आवाज़ से ऐसा समां बांधा कि दर्शक देर रात तक अपनी जगह से हिल नहीं सके।
प्रेम, भक्ति और सूफी संगीत में डूबा सिरपुर
बॉलीवुड के लोकप्रिय गीतों पर जहां दर्शक झूमते और तालियां बजाते नजर आए, वहीं सूफी और भक्ति गीतों के दौरान पूरा परिसर एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। कुछ पलों के लिए ऐसा लगा मानो समय थम गया हो और हर श्रोता सुरों के सागर में डूब गया हो।
आधुनिक गीतों की प्रस्तुति के दौरान युवाओं का उत्साह देखते ही बनता था—नारे, तालियां और मुस्कानें हर तरफ नजर आईं।
कलाकारों ने सिरपुर को बताया सौभाग्यशाली मंच
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों और दर्शकों के बीच आत्मीय संवाद भी देखने को मिला। कलाकारों ने सिरपुर की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि इस पावन भूमि पर प्रस्तुति देना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने दर्शकों के अपार प्रेम और स्नेह के लिए आभार भी जताया।
यादगार बन गया सिरपुर महोत्सव का दूसरा दिन
कुल मिलाकर, सिरपुर महोत्सव का द्वितीय दिवस संगीत, कला और संस्कृति का भव्य उत्सव बनकर उभरा। इस दिन ने न केवल स्थानीय नागरिकों, बल्कि दूर-दराज से आए पर्यटकों को भी एक ऐसा अनुभव दिया, जो लंबे समय तक उनकी यादों में गूंजता रहेगा।
