बेरोज़गारी का खतरा या सुनहरा मौका? सीएम साय ने अफसरों को चेताया—अब नहीं संभले तो पिछड़ जाएगा छत्तीसगढ़ का युवा!

रायपुर।
छत्तीसगढ़ के युवाओं के भविष्य को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बड़ा और कड़ा संदेश दिया है। महानदी भवन मंत्रालय में हुई कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग की समीक्षा बैठक में सीएम साय ने अफसरों को साफ शब्दों में निर्देश दिए कि अब लापरवाही नहीं, युवाओं को कौशल उन्नयन से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना ही होगा।

मुख्यमंत्री ने चेताया कि आने वाले समय में प्रदेश में बड़े पैमाने पर नए उद्योग स्थापित होने वाले हैं। अगर आज युवाओं को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित नहीं किया गया, तो रोजगार के ये मौके किसी और राज्य के हिस्से में जा सकते हैं।

आईटीआई नहीं सुधरे तो छिन जाएंगे मौके!

सीएम साय ने तकनीकी संस्थानों, खासकर आईटीआई के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुरानी तकनीक और कमजोर प्रशिक्षण व्यवस्था के कारण युवा रोजगार से वंचित न रह जाएं, इसके लिए उद्योगों के अनुरूप स्किल ट्रेनिंग बेहद जरूरी है।

उन्होंने सीएसएसडीए और राज्य परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज सोसायटी के एकीकरण को मंजूरी देते हुए शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही जिलों में सहायक निदेशक एवं परियोजना अधिकारियों की युक्तियुक्त पदस्थापना सुनिश्चित करने को कहा।

फर्जी हाजिरी पर लगाम, युवाओं से सीधा फीडबैक

मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण केंद्रों में आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) को सख्ती से लागू करने और प्रशिक्षित युवाओं से फीडबैक लेने वाले मॉड्यूल को और मजबूत करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि कागजों में नहीं, जमीन पर परिणाम दिखना चाहिए।

आंकड़े चौंकाने वाले, लेकिन सवाल भी बड़े

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2013 से अब तक मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 4.90 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण, जबकि 2.71 लाख से ज्यादा को रोजगार मिल चुका है।
फिलहाल प्रदेश में 356 प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाएं और 207 पंजीकृत कोर्स संचालित हैं।

60 हजार करोड़ का दांव, भविष्य की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री सेतु योजना के तहत हब-एंड-स्पोक मॉडल पर 6 क्लस्टर चुने गए हैं, जिनमें आईटीआई उन्नयन के लिए करीब 60 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
इसमें केंद्र सरकार 50%, राज्य सरकार 33% और उद्योगों की न्यूनतम 17% हिस्सेदारी तय की गई है।

नक्सल प्रभावित और पिछड़े इलाकों पर खास नजर

पीएम जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति समूहों के 1,700 युवाओं को प्रशिक्षण, वहीं आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए 600 से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा गया है।
इंजीनियरिंग और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में भी क्रमशः 31% और 36% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

संदेश साफ है—अब चूक की कोई गुंजाइश नहीं

बैठक में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, मुख्य सचिव विकासशील सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सीएम साय का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—या तो आज युवाओं को हुनर से लैस किया जाए, या कल बेरोज़गारी की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।