छत्तीसगढ़ में दवा कंपनियों और अधिकारियों की मिलीभगत पर बड़ा खुलासा, पूर्व मंत्री ने पीएमओ से जांच की मांग की

रायपुर: प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता ननकीराम कंवर ने पीएमओ के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ में चल रहे दवा कंपनियों और अधिकारियों के कथित घोटाले की जांच कराने की मांग की है। उनके मुताबिक, राज्य में कुछ बड़े दवा कंपनियां और सरकारी अधिकारी मिलकर 1000 करोड़ से अधिक की जीएसटी और आयकर चोरी कर रहे हैं।

कंवर ने पत्र में दावा किया कि जीएसटी विभाग और ड्रग कंट्रोलर कार्यालय दवा कंपनियों के साथ मिलकर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनके अनुसार, बड़े अस्पतालों और सार्वजनिक उपक्रमों के नाम पर फर्जी क्रय आदेश बनाकर रियायती दर पर दवा ली जा रही है, जिसे फिर खुले बाजार में अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है।

पत्र में उल्लेखित प्रमुख दवा कंपनियों में एबोट इंडिया लिमिटेड, बायोकॉन, रैनबेक्सी, मेनकाइंड, शीपला, सनफर्मा, डॉ. रेड्डी लैबोरेटरी, एलकेम लैबोरेटरी, टोरेन्ट फार्मास्युटिकल, शेरम इंस्टिट्यूट, जायडस और हिमालया ड्रग्स शामिल हैं।

कंवर के अनुसार, इस तरह के फर्जी आदेश हर साल 1000 करोड़ से 1200 करोड़ की दवाइयों पर बनाए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, 100 रुपये की दवा को 30 या 40 रुपये में कंपनी से ली जा रही है और इसे बिना बिल के 70 या 80 रुपये में बेचा जा रहा है। इस घोटाले में शामिल अधिकारी और कंपनी के अधिकारी हवाला और निजी लाभ के लिए सिंडिकेट का हिस्सा हैं।

पूर्व मंत्री ने पीएमओ से अनुरोध किया है कि केंद्र सरकार हस्तक्षेप कर जांच कराए, जिससे अरबों रुपए के घपले सामने आएं और दोषियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर वसूली और कानूनी कार्रवाई की जा सके।

कंवर ने पत्र में लिखा कि इस मामले की छानबीन से न केवल राज्य को हुए नुकसान का पता चलेगा, बल्कि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने में भी मदद मिलेगी।

मुख्य बिंदु:

  • दवा कंपनियां और अधिकारी मिलकर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचा रहे हैं।

  • फर्जी क्रय आदेश और रियायती दर पर दवा खरीदकर खुले बाजार में बिक्री।

  • अनुमानित वित्तीय हानि: 1000 करोड़ रुपये से अधिक।

  • पूर्व मंत्री ने पीएमओ से केंद्र सरकार द्वारा जांच की मांग की।