बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की जर्जर सड़कों पर मौत का खेल अब अदालत तक पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने PWD और NHAI को सख्त फटकार लगाते हुए कहा है कि आम नागरिकों की जान किसी भी कीमत पर लापरवाही की भेंट नहीं चढ़नी चाहिए। कोर्ट ने साफ कर दिया—जिम्मेदार विभाग और कंपनियों को बख्शा नहीं जाएगा।
मामला तब हाईकोर्ट के संज्ञान में आया जब हाल ही में एक पिकअप के ब्रेक फेल होने से 19 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। वाहन 35 फीट गहरी खाई में गिरा और पूरा इलाका दहशत में आ गया। हादसे की खबरें अखबारों में छपीं तो कोर्ट ने इसे स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका में बदल दिया।
कोर्ट में पेश हलफनामों से बड़ा खुलासा हुआ—
-
एनएच-343 की हालत सुधारने के लिए 740 करोड़ की मंजूरी मिल चुकी है, ठेका भी मई 2025 में दे दिया गया, लेकिन बारिश की वजह से काम ठप पड़ा है।
-
ब्लैक स्पॉट्स पर सुधार की प्रक्रिया केंद्र की मंजूरी का इंतजार कर रही है।
-
वहीं एनएच-130 पर पावर प्लांट्स की लापरवाही सामने आई है। ट्रकों से उड़ने वाली राख दिन में भी सड़कों पर जीरो विजिबिलिटी बना देती है। इससे हादसे बढ़ रहे हैं और आसपास के गांवों में सांस की बीमारियां फैल रही हैं।
कोर्ट ने एनटीपीसी और सीएसपीजीसीएल को छोड़कर बाकी पावर प्लांट्स को नोटिस थमा दिया है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण मंडल से भी हलफनामा मांगा है।
👉 हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस मामले की नियमित मॉनिटरिंग होगी और अगर अगली सुनवाई (10 अक्टूबर) तक ठोस कदम नहीं उठाए गए तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
