रायपुर, 21 सितंबर: नवा रायपुर सेक्टर-24 स्थित शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय परियोजना लगातार विवादों में घिरती जा रही है। रजत जयंती वर्ष पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उद्घाटन प्रस्तावित इस संग्रहालय की शुरुआत 2018 में हुई थी, जिसमें प्रारंभिक लागत लगभग 15 करोड़ रुपये थी।
विवाद का केंद्र:
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प्रारंभिक टेंडर जेपी कंस्ट्रक्शन, कोरबा को दिया गया, लेकिन परियोजना की लागत धीरे-धीरे 45 करोड़ रुपये तक बढ़ गई।
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आरोप है कि यह वृद्धि बिना नए टेंडर जारी किए की गई।
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हाल ही में 5.5 करोड़ रुपये का कंप्यूटर और डिजिटल कार्य भी बिना निविदा प्रक्रिया जोड़ा गया।
अधिकारियों पर भी सवाल:
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परियोजना की मॉनिटरिंग कर रहे ईई चक्रवर्ती, एसडीओ यशवंत राव और ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट की ज्वाइंट डायरेक्टर गायत्री नेताम पर विवादास्पद निर्णय लेने और राशि बढ़ाने के आरोप लग रहे हैं।
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संग्रहालय में बन रही मूर्तियों का डिजाइन और थीम किसी सक्षम समिति से स्वीकृत नहीं कराई गई।
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वेंडर अपने स्तर पर मूर्तिकारों से काम करवा रहा है और भारी कमीशनबाजी की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय शिकायतें और पारदर्शिता पर सवाल:
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स्थानीय स्तर पर वसूली और दबाव की शिकायतें सामने आई हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन से पहले परियोजना की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं।
क्या उद्घाटन से पहले इन विवादों को सुलझाया जा पाएगा, या परियोजना के गड़बड़िय़ों का पर्दाफाश सार्वजनिक होगा? रायपुर की जनता इस परियोजना की वास्तविक लागत और पारदर्शिता पर नजर रखे हुए है।
