छत्तीसगढ़ के जंगलों में मिलने वाला महुआ अब केवल एक वन उपज नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं की आर्थिक आजादी और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुका है। वन धन विकास केंद्र योजना के जरिए महिलाओं को महुआ से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे उनकी आय में कई गुना बढ़ोतरी हुई है और वे सफल उद्यमी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
यह पहल जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड (TRIFED) द्वारा वर्ष 2018 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य लघु वनोपज एकत्र करने वाले आदिवासी समुदायों को प्रशिक्षण देकर, उनके उत्पादों का मूल्यवर्धन कर स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना है।
कोरिनभाठा की महिलाओं ने लिखी सफलता की नई कहानी
राजनांदगांव जिले के कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र की महिलाओं ने इस योजना का भरपूर लाभ उठाया है। पहले वे केवल महुआ के फूल एकत्र कर बेचती थीं, लेकिन अब प्रशिक्षण के बाद महुआ से लड्डू, कुकीज़, एनर्जी बार, स्क्वैश, जैम और कई अन्य उत्पाद तैयार कर रही हैं।
आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक और आकर्षक पैकेजिंग की वजह से इन उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग बन रही है, जिससे महिलाओं की आमदनी लगातार बढ़ रही है।
सिर्फ उत्पाद नहीं, कारोबार चलाने की भी मिल रही ट्रेनिंग
वन धन विकास केंद्रों में महिलाओं को केवल उत्पाद बनाना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छ उत्पादन, पैकेजिंग, लेबलिंग, भंडारण और विपणन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी जाती हैं। इससे वे बाजार की मांग के अनुरूप बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर उचित कीमत प्राप्त कर रही हैं।
महुआ के मूल्यवर्धन से बढ़े रोजगार के अवसर
महुआ के फूलों और बीजों का मूल्यवर्धन होने से उसकी उपयोगिता और बाजार मूल्य दोनों में वृद्धि हुई है। अब कच्चा महुआ बेचने की बजाय उससे तैयार उत्पादों की बिक्री से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। इसका सीधा लाभ ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी दिखाई दे रहा है।
‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ दिला रहा देशभर में पहचान
महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे इन उत्पादों को ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के माध्यम से व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल के जरिए वन आधारित प्राकृतिक उत्पादों को नई पहचान मिल रही है और महिला स्व-सहायता समूहों को अपने उत्पाद बेचने के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद संघ की इस पहल के तहत वन शहद, एलोवेरा जेल, हर्बल जूस, महुआ उत्पाद, आयुर्वेदिक चूर्ण और हर्बल तेल जैसे कई उत्पाद भी तैयार कर बाजार तक पहुंचाए जा रहे हैं।
आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं ग्रामीण महिलाएं
कोरिनभाठा की महिलाओं की सफलता यह साबित करती है कि यदि सही प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और बेहतर विपणन व्यवस्था मिले, तो वन संपदा को रोजगार और समृद्धि का मजबूत माध्यम बनाया जा सकता है। वन धन विकास केंद्र योजना आज न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे रही है।
