रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। खमतराई इलाके के बजरंग नगर उरकुरा निवासी 64 वर्षीय किराना दुकानदार को कथित साइबर ठगों ने करीब 45 दिनों तक अपने जाल में फंसाए रखा। कभी खुद को सीबीआई अधिकारी तो कभी आईपीएस अफसर बताकर वीडियो कॉल करने वाले आरोपियों ने दुकानदार को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार कराने की धमकी दी।
डर और लगातार दबाव के बीच दुकानदार ने अपनी जमा पूंजी तक ठगों के बताए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। जब खाते में पैसे कम पड़ गए तो कथित तौर पर सोने के जेवर बेचकर रकम जुटाई। 4 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच अलग-अलग खातों में कई बार रकम भेजी गई और कुल 8.50 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए। ठगों की मांग इसके बाद भी जारी रही।
महिला ने फोन कर बताया 6.80 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, देवसिंह साहू के साथ ठगी का सिलसिला 18 अगस्त को शुरू हुआ। सुबह करीब 9 बजे उनके मोबाइल पर एक महिला का फोन आया। महिला ने दावा किया कि उनके नाम से आईसीआईसीआई बैंक में खुले एक खाते में 6.80 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है।
बातचीत के दौरान महिला ने उन्हें आदित्य नाम के व्यक्ति से बात कराई। आरोप है कि आदित्य ने देवसिंह से परिवार, जमीन और बैंक खातों से संबंधित निजी जानकारी हासिल की। इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से लगातार फोन और व्हाट्सऐप कॉल आने लगे।
कभी CBI तो कभी IPS अधिकारी बनकर दी धमकी
इसके बाद एक व्यक्ति ने अपना नाम बलराज सिंह बताते हुए खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। उसने भी देवसिंह से व्यक्तिगत और पारिवारिक जानकारी हासिल की। कुछ समय बाद वीडियो कॉल पर प्रदीप सिंह नाम के एक व्यक्ति से बात कराई गई, जिसने खुद को आईपीएस अधिकारी बताया।
आरोप है कि प्रदीप ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग का हवाला देकर देवसिंह को जेल भेजने की धमकी दी। साथ ही यह डर भी दिखाया गया कि यदि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उनके परिवार के सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जा सकता है।
लगातार वीडियो कॉल और धमकियों के जरिए उन्हें दबाव में रखा गया। कथित ठगों ने उन्हें किसी अन्य व्यक्ति को जानकारी देने से भी रोका। डर का असर इतना था कि देवसिंह ने अपने बेटे और बेटी तक को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी नहीं दी।
4 सितंबर से 1 अक्टूबर तक खाते में भेजे 8.50 लाख
इसके बाद रकम ट्रांसफर करने का सिलसिला शुरू हुआ। आरोपियों ने कथित तौर पर देवसिंह से कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी रकम के मिलान के लिए उन्हें पैसे जमा कराने होंगे। रकम नहीं देने पर कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाया गया।
पुलिस के मुताबिक, 4 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच देवसिंह ने आरोपियों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में कई ट्रांजेक्शन किए। अधिकतर बार उन्होंने एक-एक लाख रुपये जमा किए, जबकि एक बार 50 हजार रुपये भी ट्रांसफर किए गए। इस तरह अलग-अलग खातों में रकम भेजते-भेजते कुल 8.50 लाख रुपये ठगों के पास पहुंच गए।
बताया गया कि इस रकम में देवसिंह की जमा पूंजी भी शामिल थी। जब बैंक में उपलब्ध पैसे कम पड़ गए तो उन्होंने सोने के जेवर बेचकर भी रकम जुटाई। इसके बावजूद कथित ठगों की मांग खत्म नहीं हुई।
भाई को बताई पूरी बात तो खुला डिजिटल अरेस्ट का राज
लगातार पैसों की मांग बढ़ने के बाद 3 अक्टूबर को देवसिंह ने आखिरकार अपने छोटे भाई सुंदर लाल साहू को पूरी घटना की जानकारी दी। भाई ने बातचीत और घटनाक्रम को समझने के बाद उन्हें बताया कि यह कोई सरकारी जांच नहीं, बल्कि साइबर ठगी का तरीका हो सकता है।
इसके बाद देवसिंह ने ठगों से हुई चैट, मैसेज के स्क्रीनशॉट, बैंक स्टेटमेंट और रकम ट्रांसफर करने की रसीदें जुटाईं। 4 अक्टूबर को उन्होंने खमतराई थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
दो मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जांच में जुटी पुलिस
शिकायत मिलने के बाद खमतराई पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। FIR में ठगी के दौरान इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल नंबरों के धारकों को संदिग्ध आरोपी बनाया गया है।
पुलिस अब इन मोबाइल नंबरों के साथ उन बैंक खातों की भी जांच कर रही है, जिनमें पीड़ित ने रकम ट्रांसफर की थी। जांच का मुख्य फोकस ट्रांजेक्शन की कड़ियों को जोड़कर साइबर ठगी के नेटवर्क तक पहुंचना है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल हैं और पीड़ित से हासिल रकम आगे किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर ठग किस तरह फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। किसी भी जांच एजेंसी द्वारा वीडियो कॉल पर लंबे समय तक निगरानी रखने, निजी बैंक खातों में पैसे जमा कराने या जांच के नाम पर रकम ट्रांसफर करने की मांग बेहद गंभीर संकेत हो सकती है। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय संबंधित पुलिस या साइबर अपराध प्राधिकरण से तुरंत संपर्क करना जरूरी है।
