5 साल बाद शिक्षिका को हाईकोर्ट से बड़ी राहत! बर्खास्तगी पर कोर्ट ने लगाया ब्रेक, विभाग के आदेश पर उठाए सवाल

 


बिलासपुर।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बालोद जिले की एक बर्खास्त सहायक शिक्षिका को बड़ी राहत मिली है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने बालोद जिले के जनपद पंचायत डौंडीलोहारा द्वारा जारी सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) के आदेश को निरस्त करते हुए शिक्षिका तस्लीम बानो की याचिका स्वीकार कर ली है।

तस्लीम बानो वर्ष 2005 में सहायक शिक्षक पंचायत के पद पर नियुक्त हुई थीं और वर्ष 2009 में उनका नियमितीकरण हुआ था। पारिवारिक कारणों से उन्होंने 9 फरवरी 2015 को अवैतनिक अवकाश के लिए आवेदन दिया था। बाद में 4 नवंबर 2020 को व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने विकासखंड शिक्षा अधिकारी, डौंडीलोहारा के समक्ष त्यागपत्र भी सौंपा, लेकिन विभाग ने इसे स्वीकार नहीं किया।

इसके बाद विभागीय जांच करते हुए 24 अगस्त 2021 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत डौंडीलोहारा ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए तस्लीम बानो ने बिलासपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

मामले की अंतिम सुनवाई 7 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की अदालत में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने दलील दी कि विभाग ने शिक्षिका को उचित सुनवाई का अवसर दिए बिना कार्रवाई की और गलत नियम के तहत बर्खास्त किया।

याचिका में कहा गया कि तस्लीम बानो नियमित कर्मचारी थीं, इसलिए उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1999 के नियम-7 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए थी, जबकि विभाग ने नियम-10 के तहत कार्रवाई कर सेवा से बर्खास्त कर दिया, जो विधिसम्मत नहीं था।

दलीलों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत डौंडीलोहारा द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया और तस्लीम बानो की याचिका स्वीकार कर ली। यह फैसला विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए जाने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

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