रात के अंधेरे में खेत से लौट रहे थे ग्रामीण, डंडों-लातों से तोड़ा गया जिस्म… अस्पताल पहुंचते-पहुंचते थम गई सांस
बलरामपुर।छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक ऐसी खौफनाक घटना सामने आई है, जिसने प्रशासनिक तंत्र पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। बाक्साइट के अवैध खनन की जांच के नाम पर पहुंची राजस्व टीम पर आरोप है कि उसने तीन निर्दोष ग्रामीणों को बेरहमी से पीटा, जिसमें एक बुजुर्ग ग्रामीण की मौत हो गई, जबकि दो अन्य जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
खेत से लौटते समय मौत से सामना
घटना कुसमी थाना क्षेत्र के हंसपुर गांव की है। जानकारी के मुताबिक, कुसमी SDM करुण डहरिया और नायब तहसीलदार पारस शर्मा रविवार देर रात स्थानीय युवकों के साथ जांच के लिए पहुंचे थे। उसी दौरान राम नरेश राम (60), अजीत उरांव (60) और आकाश अगरिया (20) गेहूं के खेत में सिंचाई कर घर लौट रहे थे।
आरोप है कि सरना के पास SDM की गाड़ी ने उन्हें रोका और बिना किसी ठोस कारण के डंडों और लात-घूंसों से बेदम पीटा गया। मारपीट इतनी भयावह थी कि रास्ते में ही राम नरेश राम बेहोश हो गए।
अस्पताल पहुंचते ही मौत, गांव में सन्नाटा
तीनों को जबरन वाहन में बैठाकर कुसमी लाया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुसमी ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान राम नरेश राम की मौत हो गई।
दो अन्य घायल ग्रामीणों का इलाज जारी है।
इलाके में तनाव, पुलिस बल तैनात
मौत की खबर फैलते ही इलाके में हंगामे की आशंका बढ़ गई। अस्पताल और थाने में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्व दीपक त्रिपाठी, एडिशनल एसपी बलरामपुर, खुद कुसमी पहुंच गए हैं। वहीं अंबिकापुर से फॉरेंसिक टीम भी बुलाई गई है।
अब तक FIR नहीं, सवालों में कानून
चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी FIR दर्ज नहीं की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, SDM, नायब तहसीलदार और मारपीट में शामिल बताए जा रहे स्थानीय युवक—सुदीप, मंदीप और विक्की सिंह—को राजपुर थाने में बैठाकर रखा गया है।
अवैध खनन, ब्लैकमेलिंग और खून
बताया जा रहा है कि हंसपुर में बाक्साइट का अवैध उत्खनन हो रहा था। ग्रामीणों ने एक ट्रक पकड़ा था और ब्लैकमेलिंग की सूचना प्रशासन को मिली थी। इसी सूचना पर टीम बिना सुरक्षा के मौके पर पहुंची—और फिर जो हुआ, उसने एक जान ले ली।
अब सवाल यह है —
क्या जांच के नाम पर किसी की जान लेना जायज है?
क्या कानून के रखवाले ही कानून तोड़ने लगें तो इंसाफ कौन देगा?
यह मामला सिर्फ एक मौत नहीं, प्रशासनिक बर्बरता का खौफनाक चेहरा बनकर सामने आया है।
