नई दिल्ली। अगर आप खेती-किसानी से जुड़े हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की हो सकती है। केंद्र सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और खेती के खर्च में मदद देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इनमें कुछ योजनाएं ऐसी हैं, जिनके जरिए किसानों को सीधी आर्थिक सहायता, बुढ़ापे में पेंशन और खेती के लिए आसान ऋण की सुविधा मिलती है।
हालांकि जानकारी के अभाव में कई पात्र किसान इन योजनाओं का पूरा लाभ नहीं उठा पाते। आज हम आपको ऐसी ही 3 सरकारी योजनाओं के बारे में बता रहे हैं, जो खेती करने वाले किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती हैं।
1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना
सबसे पहले बात करते हैं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि यानी PM-KISAN की। यह किसानों के बीच सबसे चर्चित सरकारी योजनाओं में से एक है।
इस योजना के तहत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को हर साल ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह रकम तीन बराबर किस्तों में यानी ₹2,000-₹2,000 करके सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।
इस सहायता का उद्देश्य किसानों को खेती और घरेलू जरूरतों के लिए अतिरिक्त आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है।
किन किसानों को नहीं मिलता PM-KISAN का लाभ?
PM-KISAN का लाभ लेने के लिए किसान के नाम पर खेती योग्य जमीन का रिकॉर्ड होना जरूरी है। साथ ही ई-केवाईसी, आधार से बैंक खाते की लिंकिंग और भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन जैसी शर्तें पूरी करनी होती हैं।
वहीं संस्थागत भूमिधारक किसान इस योजना के दायरे में नहीं आते। ऐसे परिवार भी पात्र नहीं होते, जिनमें कोई सदस्य आयकरदाता है।
इसके अलावा डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट और आर्किटेक्ट जैसे कुछ पंजीकृत पेशेवर भी निर्धारित नियमों के तहत अपात्र श्रेणी में आते हैं।
2. प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना
दूसरी योजना किसानों के बुढ़ापे को आर्थिक सहारा देने से जुड़ी है। इसका नाम है प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना।
इस योजना में पात्र किसानों को 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद हर महीने ₹3,000 की पेंशन दी जाती है। यानी सालाना आधार पर किसान को ₹36,000 की पेंशन मिल सकती है।
इस योजना में शामिल होने के लिए किसान की उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसके पास अधिकतम 2 हेक्टेयर तक खेती योग्य भूमि होनी चाहिए।
किसान को अपनी उम्र के हिसाब से हर महीने ₹55 से ₹200 तक का योगदान करना होता है। खास बात यह है कि किसान जितनी राशि जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी योगदान के तौर पर जमा करती है।
किसान की मृत्यु होने पर परिवार को क्या मिलेगा?
इस योजना में पारिवारिक पेंशन का भी प्रावधान है। यदि पेंशन प्राप्त कर रहे किसान की मृत्यु हो जाती है, तो नियमों के अनुसार उसके जीवनसाथी को पेंशन की 50 फीसदी राशि पारिवारिक पेंशन के रूप में मिल सकती है।
इस तरह यह योजना सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि उसके परिवार को भी आर्थिक सुरक्षा देने में मदद करती है।
3. किसान क्रेडिट कार्ड से मिल सकता है ₹5 लाख तक का लोन
तीसरी योजना किसानों की सबसे बड़ी जरूरत यानी खेती के लिए पैसों की व्यवस्था से जुड़ी है। किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC के जरिए पात्र किसानों को कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए ऋण सुविधा मिलती है।
खेती में बीज, खाद, सिंचाई, कीटनाशक, मजदूरी और दूसरे कामों के लिए अक्सर बड़ी रकम की जरूरत पड़ती है। ऐसे समय में KCC किसानों को बैंक से ऋण लेने की सुविधा देता है।
खास बात यह है कि इसका इस्तेमाल सिर्फ फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है। पशुपालन, डेयरी, पोल्ट्री और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से जुड़े पात्र लाभार्थी भी KCC के जरिए ऋण सुविधा का लाभ ले सकते हैं।
₹5 लाख का लोन किस आधार पर मिलेगा?
KCC के तहत मिलने वाली ऋण सीमा हर किसान के लिए एक जैसी नहीं होती। बैंक किसान की जमीन, फसल पैटर्न, उत्पादन लागत और वित्तीय जरूरत जैसे कई पहलुओं का मूल्यांकन करके क्रेडिट लिमिट तय करते हैं।
पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार ₹5 लाख तक की ऋण सुविधा मिल सकती है। इससे खेती के लिए जरूरी पूंजी जुटाना आसान हो सकता है और किसानों की साहूकारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
किसानों के लिए क्यों खास हैं ये तीनों योजनाएं?
अगर तीनों योजनाओं को एक साथ समझें तो इनका फायदा अलग-अलग जरूरतों में मिलता है। PM-KISAN खेती और घरेलू जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता देता है, किसान मानधन बुढ़ापे में पेंशन के जरिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है और KCC खेती तथा संबंधित गतिविधियों के लिए ऋण की सुविधा देता है।
यानी किसान के लिए ये तीनों योजनाएं आय सहायता, सामाजिक सुरक्षा और खेती के लिए वित्तीय मदद का मजबूत आधार बन सकती हैं। हालांकि किसी भी योजना का लाभ लेने से पहले अपनी पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी आधिकारिक नियमों के अनुसार जरूर जांच लें।
