चंदन कांड से दहला कोरिया! सरकारी नर्सरी में रातों-रात गायब हुए बेशकीमती पेड़, वन विभाग पर सिंडिकेट के आरोप, आंदोलन की चेतावनी

सोनहत/बैकुंठपुर। कोरिया वनमंडल की सुरक्षा व्यवस्था पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब सोनहत स्थित शासकीय स्थायी रोपणी (नर्सरी) से आधा दर्जन बेशकीमती चंदन के वयस्क पेड़ों की अवैध कटाई और चोरी का मामला सामने आया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह घटना वन विभाग की उस नर्सरी में हुई, जिसे सुरक्षा की दृष्टि से सबसे संवेदनशील और सुरक्षित माना जाता है। फेंसिंग से घिरे परिसर के भीतर से चंदन के पेड़ों का गायब हो जाना अब वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। आरोप है कि विभागीय लापरवाही और कमजोर निगरानी के कारण चंदन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वे अब सरकारी परिसरों तक में सेंध लगाने लगे हैं।

भाजयुमो नेताओं ने की मौके पर जांच

मामले की जानकारी मिलने के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा के मंडल महामंत्री मनोज साहू के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं की टीम नर्सरी पहुंची। टीम ने मौके पर कटे हुए चंदन के पेड़ों के ठूंठ और अवशेषों का निरीक्षण किया तथा चोरी की पुष्टि की।

इसके बाद भाजयुमो ने वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) कोरिया को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई करने और लापरवाह अधिकारियों को तत्काल हटाने की मांग की है।

मुख्यालय के भीतर चोरी, तो जंगलों की सुरक्षा पर सवाल

घटना के बाद स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि जब जिला और ब्लॉक मुख्यालय से सटी शासकीय नर्सरी ही सुरक्षित नहीं है, तो दूरस्थ जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा का दावा कितना मजबूत होगा। लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर विभागीय निगरानी सबसे अधिक होनी चाहिए, वहीं से चंदन जैसे बहुमूल्य वृक्षों का गायब होना गंभीर चिंता का विषय है।

अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने वन अमले की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कई अधिकारी संवेदनशील वन क्षेत्रों के नियमित निरीक्षण के बजाय मुख्य सड़कों तक ही अपनी गतिविधियां सीमित रखते हैं। ऐसे में वन संपदा की सुरक्षा का पूरा भार निचले स्तर के कर्मचारियों पर छोड़ दिया जाता है।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घटना के बाद विभागीय निगरानी और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है।

साल और सागौन के बाद अब चंदन पर तस्करों की नजर

स्थानीय जानकारों का दावा है कि क्षेत्र में पूर्व में साल और सागौन की अवैध कटाई के मामले भी सामने आते रहे हैं। अब चंदन के पेड़ों की चोरी ने यह आशंका और गहरा दी है कि वन तस्करों के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वन संपदा को और बड़ा नुकसान हो सकता है।

मनोज साहू ने की सख्त कार्रवाई की मांग

भाजयुमो मंडल महामंत्री मनोज साहू ने कहा कि यह केवल पेड़ों की चोरी का मामला नहीं, बल्कि वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो भाजयुमो आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

जन सहयोग समिति ने भी दी घेराव की चेतावनी

कोरिया जन सहयोग समिति के अध्यक्ष पुष्पेंद्र राजवाड़े ने भी घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यदि सुरक्षित मानी जाने वाली शासकीय नर्सरी में ही चंदन के पेड़ सुरक्षित नहीं हैं, तो वन विभाग के सुरक्षा दावों पर विश्वास करना मुश्किल है।

उन्होंने क्षेत्र में साल, सागौन और चंदन की कथित तस्करी की व्यापक जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वन विभाग का घेराव किया जाएगा।

अब सबकी नजर डीएफओ के फैसले पर

चंदन चोरी का यह मामला सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली, निगरानी तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब लोगों की नजर वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) कोरिया पर टिकी है कि इस मामले में जांच और कार्रवाई किस स्तर तक पहुंचती है। फिलहाल पूरे जिले में इस कथित “चंदन कांड” की चर्चा जोरों पर है और लोग दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।