CM साय अचानक पहुंचे इस स्कूल के ‘रहस्यमयी म्यूजियम’ में! अंदर क्या देखा कि देर तक देखते रह गए मुख्यमंत्री?

रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने राजधानी Raipur के वीआईपी रोड स्थित BSS Pranavananda School पहुंचकर स्कूल परिसर में स्थापित कल्चरल एंड हेरिटेज म्यूजियम का अवलोकन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने भारत माता की मूर्ति और स्कूल के संस्थापक Swami Pranavananda की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धापूर्वक नमन किया।

स्कूल के सचिव Swami Shivaroopananda महाराज ने मुख्यमंत्री को संग्रहालय का विस्तृत भ्रमण कराया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उत्सुकता के साथ म्यूजियम में प्रदर्शित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, ऋषि-मुनियों और महान विभूतियों से जुड़ी जानकारियां ध्यानपूर्वक देखीं और भारत सेवाश्रम संघ द्वारा संचालित मानव कल्याण से जुड़े कार्यों की जानकारी भी ली।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्कूली बच्चों को भारत के गौरवशाली इतिहास और महान व्यक्तित्वों के योगदान से परिचित कराने की यह पहल बेहद सराहनीय है। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और गौरवशाली रही है, जिसे हमारे ऋषि-मुनियों, विद्वानों और महापुरुषों ने अपने ज्ञान, तप और त्याग से और अधिक महान बनाया है।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे बच्चों में राष्ट्र, संस्कृति और मूल्यों के प्रति गर्व की भावना विकसित होती है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि बीएसएस प्रणवानंद स्कूल द्वारा स्थापित यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को धर्म, ग्रंथों, संस्कृति और भारतीय परंपराओं से जोड़ने का प्रेरणादायक माध्यम बनेगा।

इस अवसर पर स्कूल के सचिव स्वामी शिवरूपानंद महाराज ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को शॉल और स्मृति-चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

उल्लेखनीय है कि स्कूल परिसर में स्थापित इस संग्रहालय में भारत के महान ऋषि-मुनियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इनमें Swami VivekanandaRaja Ram Mohan RoyPrithviraj ChauhanRani LakshmibaiKhudiram BoseDayananda Saraswati और Birsa Munda सहित कई महान विभूतियों की जानकारी उनके जीवन और कार्यों के साथ प्रदर्शित की गई है।

यह म्यूजियम न सिर्फ इतिहास को जीवंत बनाता है, बल्कि छात्रों को भारत की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराने का एक अनोखा और प्रेरणादायक प्रयास भी है।