मुंबई BMW हिट-एंड-रन केस में आरोपी को झटका…सुप्रीम कोर्ट ने मिहिर शाह को जमानत से किया इनकार

‘ऐसे मामलों में सबक सिखाना जरूरी’, सुप्रीम कोर्ट ने मिहिर शाह को जमानत से किया इनकार

नई दिल्ली/मुंबई: मुंबई के बहुचर्चित BMW हिट-एंड-रन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी मिहिर शाह (24) को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में “सबक सिखाना ज़रूरी है” और आरोपी को फिलहाल जेल में ही रहना चाहिए।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने 13 दिसंबर को सुनवाई के दौरान कहा कि माता-पिता की भी जिम्मेदारी बनती है और समाज बच्चों को सही संस्कार देने में विफल रहा है। कोर्ट ने इस तथ्य पर भी नाराज़गी जताई कि आरोपी एक संपन्न परिवार से है और उसके पिता राजेश शाह राजनीति से जुड़े रहे हैं।
पीठ ने टिप्पणी की कि आरोपी ने देर रात वाहन बदला, हादसा किया और फरार हो गया—ऐसे आचरण में जमानत नहीं दी जा सकती।

क्या है पूरा मामला

यह हादसा जुलाई 2024 में मुंबई के वर्ली सी फेस रोड पर हुआ था। आरोप है कि मिहिर शाह नशे की हालत में तेज़ रफ्तार BMW चला रहा था, तभी उसने स्कूटर सवार दंपति को टक्कर मार दी। स्कूटर चला रहे प्रदीप नाखवा तो गिरकर बच गए, लेकिन उनकी पत्नी की मौके पर मौत हो गई। आरोप है कि महिला का शव करीब दो किलोमीटर तक सड़क पर घसीटता चला गया।
पुलिस जांच में शराब के नशे की पुष्टि हुई। हादसे के बाद आरोपी फरार हो गया था और दो दिन बाद गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी के पिता और ड्राइवर को भी मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

हाईकोर्ट पहले ही कर चुका है जमानत खारिज

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 21 नवंबर 2024 को जमानत याचिका खारिज करते हुए अपराध की गंभीरता, गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका का हवाला दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह छूट दी थी कि ट्रायल कोर्ट में अहम गवाहों के बयान के बाद आरोपी दोबारा आवेदन कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ

सुप्रीम कोर्ट में आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने भविष्य में जमानत का विकल्प खुला रखा है। इस पर पीठ ने याचिका वापस लेने का सुझाव दिया। बाद में आरोपी पक्ष ने जमानत याचिका वापस ले ली, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

लागू धाराएं

मिहिर शाह पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत मामला दर्ज है, जो गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide not amounting to murder) से संबंधित है। इस धारा में उम्रकैद तक की सज़ा का प्रावधान है।