रायपुर। राजधानी रायपुर के होटल, क्लब और फार्महाउस अब न सिर्फ एंटरटेनमेंट स्पॉट बन गए हैं, बल्कि युवाओं के लिए ड्रग्स पार्टी का गढ़ भी बनते जा रहे हैं। टेबल पर सफेद पाउडर, प्लास्टिक कार्ड और रोल पेपर के माध्यम से खुलेआम नशा किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इन जगहों पर हजारों रुपये की टेबल बुकिंग होती है और क्लब और फार्महाउस मालिक एंटरटेनमेंट टैक्स चोरी के जरिए सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे हैं। स्थानीय एक्साइज़ विभाग और प्रशासन की नाकामी से नशा कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है।
गांव के युवकों का उपयोग तस्करी के लिए
ड्रग्स सप्लाई के लिए राजधानी की सड़कों और गांवों के भोले-भाले युवकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रायपुर में सक्रिय तीन बड़े गैंग — ्र्य गैंग, बनिया गैंग और स्क्र गैंग — युवकों को जोड़कर सप्लाई चेन चला रहे हैं। ग्राहक की डिमांड के अनुसार ड्रग्स की डिलीवरी होती है और गैंग अपने सदस्यों को ट्रेनिंग भी देता है कि पुलिस से कैसे बचना है।
शहरी और आउटर क्षेत्र भी प्रभावित
राजेन्द्र नगर, समता कॉलोनी, शिवनगर, भाठागांव, डीडी नगर, नेहरू नगर, कालीबाड़ी, देवेंद्र नगर और तेलीबांधा थाना क्षेत्र इस नेटवर्क से अछूते नहीं हैं। आरोप हैं कि कुछ पुलिसकर्मी इन गैंग्स के साथ सांठगांठ कर मामलों को दबाते हैं। जेल से जमानत पर आने वाले आरोपी फिर से इस धंधे में लग जाते हैं।
पुलिस की बड़ी सफलता
हालांकि पुलिस ने कई बड़ी कार्रवाइयां भी की हैं:
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जगदलपुर में 10 किलो से अधिक गांजा और हशीश तेल जब्त किया गया, जिसकी कीमत लगभग 1.29 करोड़ रुपये थी। ओडिशा के दो तस्कर गिरफ्तार हुए।
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गरियाबंद में 29.5 किलो गांजा, नगदी, वाहन और मोबाइल जब्त किए गए; 9 तस्कर गिरफ्तार।
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इस सप्ताह अब तक कुल 89 किलो अवैध गांजा जब्त किया जा चुका है और 17 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
सवाल प्रशासन पर
वायरल वीडियो और लगातार बढ़ते मामलों के बावजूद यह सवाल उठता है कि रायपुर पुलिस इन ड्रग्स गैंग्स पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही? क्या सेल्फ ड्राइव कंपनियों और आउटर रूट्स की निगरानी बढ़ाने की जरूरत नहीं है?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह नेटवर्क समय रहते नहीं रोका गया तो रायपुर जल्द ही नशे का बड़ा केंद्र बन सकता है, और युवाओं का भविष्य इस व्यापार के कारण खतरे में पड़ जाएगा।
