जशपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर जिला पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को छू रहा है। सुंदर वादियों, झरनों और घने जंगलों से भरपूर यह जिला अब एडवेंचर और इको-टूरिज्म के लिए प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मायली नेचर कैंप में सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण की पहली बैठक आयोजित की। इसका उद्देश्य न केवल पर्यटकों को रोमांचक अनुभव देना है, बल्कि उन्हें जशपुर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना भी है।
जशपुर की लोकल संस्कृति और आदिवासी परंपराएं, जैसे कर्मा नृत्य और पारंपरिक उत्सव, अब पर्यटकों के लिए अनुभवात्मक पर्यटन का हिस्सा बन रही हैं। इसके अलावा रॉक क्लाइम्बिंग, ट्रेकिंग, नदी के किनारे कैंपिंग, बर्ड वॉचिंग जैसी गतिविधियों से पर्यटकों को रोमांचक अनुभव और पर्यावरणीय शिक्षा दोनों मिल रही है।
जिला प्रशासन ने स्थानीय समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देते हुए गाइड्स, शिल्पकार और स्थानीय कलाकारों को रोजगार के अवसर दिए हैं। इससे न केवल आर्थिक लाभ हुआ है, बल्कि स्थानीय कला और संस्कृति का संरक्षण भी सुनिश्चित हुआ है।
भविष्य की योजनाओं के तहत, अगले पाँच वर्षों में जशपुर को छत्तीसगढ़ का प्रमुख पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मयाली एडवेंचर ज़ोन में एक्वा साइकिलिंग, कयाकिंग, स्पीड बोट, फ्लोटिंग जेटी और बम्पर बोट जैसी गतिविधियाँ शुरू की गई हैं।
मुख्यमंत्री साय द्वारा तीन प्रमुख पर्यटन सर्किटों का लोकार्पण किया गया—स्पिरिचुअल और हेरिटेज सर्किट, साहसिक पर्यटन सर्किट, और इको-टूरिज्म सर्किट। इन सर्किटों में मधेश्वर महादेव, कैलाश गुफा, दनगरी कैम्प साइट, बेलवार जलप्रपात जैसी जगहें शामिल हैं। पर्यटन और युवा प्रशिक्षण को जोड़ते हुए जनजातीय युवाओं को पर्वतारोहण और क्लाइम्बिंग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और कौशल दोनों में वृद्धि होगी।
जशपुर अब न केवल प्राकृतिक सुंदरता, बल्कि सांस्कृतिक समृद्धि और साहसिक गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
