नई दिल्ली। लंग कैंसर दुनिया भर में सबसे घातक कैंसरों में से एक है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रारंभिक चरण में इसके लक्षण अक्सर अस्पष्ट होते हैं, जिससे समय पर पहचान मुश्किल हो जाती है। साथ ही बढ़ता प्रदूषण और धुएँ का संपर्क फेफड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और कैंसर सहित अन्य श्वसन रोगों का खतरा बढ़ाता है।
लंग कैंसर के शुरुआती 4 लक्षण:
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लगातार खांसी या खांसी में बदलाव: लंबे समय तक बनी खांसी या खांसी में अचानक बदलाव को नजरअंदाज न करें। खांसी के साथ खून आना गंभीर संकेत हो सकता है।
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सांस लेने में कठिनाई और छाती में दर्द: फेफड़ों की क्षमता प्रभावित होने से हल्की गतिविधि में भी थकान, सांस की दिक्कत और छाती में दबाव महसूस हो सकता है।
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आवाज़ में बदलाव या गला खराब होना: लगातार खांसी और ट्यूमर के दबाव से आवाज़ भारी या खोखली हो सकती है। 2–3 हफ्ते तक आवाज़ में बदलाव बना रहे तो जांच जरूरी है।
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वजन में अचानक कमी और भूख की कमी: बिना कारण वजन तेजी से कम होना, भूख कम लगना और थकान लंग कैंसर का संकेत हो सकता है।
फेफड़ों पर प्रदूषण का असर:
वायु प्रदूषण और धुएँ के कण (PM2.5, PM10), कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि फेफड़ों के अल्वेओली और श्वसन मार्ग को नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय तक प्रदूषण में रहने से फेफड़े कमजोर होते हैं और लंग कैंसर, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। शहरी क्षेत्रों में वाहनों और धुएँ की मात्रा अधिक होने से फेफड़ों की क्षमता पर असर पड़ सकता है।
सुरक्षा और रोकथाम के उपाय:
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प्रदूषण वाले इलाकों में मास्क पहनें।
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धूम्रपान से बचें और धुएँ से दूरी बनाए रखें।
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नियमित स्वास्थ्य जांच, फेफड़ों की एक्स-रे या CT स्कैन कराएं।
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संतुलित आहार लें, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन और फाइबर पर्याप्त मात्रा में हों।
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शारीरिक गतिविधि और योगाभ्यास से फेफड़ों की क्षमता बनाए रखें।
