रायपुर। बस्तर की एक युवती ने यह साबित कर दिया कि सफलता के लिए सिर्फ नौकरी ही एकमात्र रास्ता नहीं होती। बीएससी एग्रीकल्चर स्नातक ग्रेसी दुग्गा ने आधुनिक सूकरपालन (पिग फार्मिंग) को अपनाकर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो आज पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के किंजोली गांव की रहने वाली ग्रेसी ने वर्ष 2023 में देहरादून से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा या नौकरी की तलाश करने के बजाय उन्होंने आधुनिक पशुपालन के क्षेत्र में अपना उद्यम शुरू करने का फैसला लिया।
सरकारी मदद से करोड़ से ज्यादा की परियोजना खड़ी
ग्रेसी ने पशु चिकित्सा विभाग के मार्गदर्शन में 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपये की आधुनिक सूकरपालन परियोजना तैयार की। इस परियोजना को केंद्र सरकार की नेशनल लाइव स्टॉक मिशन (National Livestock Mission) के तहत मंजूरी मिली और उन्हें 30 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई।
ग्रेसी बताती हैं कि यदि यह सरकारी सहायता नहीं मिलती, तो वह केवल 20–25 सूकरों के साथ छोटा व्यवसाय शुरू कर पातीं। लेकिन अनुदान मिलने से उन्हें आधुनिक सुविधाओं वाला बड़ा फार्म स्थापित करने का अवसर मिला।
110 सूकरों से शुरुआत, अब 400 से ज्यादा का फार्म
मई 2025 में ग्रेसी ने 100 मादा और 10 नर सहित कुल 110 प्रजनन योग्य सूकरों के साथ फार्म की शुरुआत की। पशुपालन विभाग और कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में उन्नत नस्ल के सूकर लाए गए तथा वैज्ञानिक तरीके से उनका पालन-पोषण किया गया।
बेहतर प्रबंधन का परिणाम यह रहा कि जून 2026 तक फार्म में 202 वयस्क सूकर और लगभग 206 पिगलेट तैयार हो चुके हैं। वर्तमान में उनके फार्म में 400 से अधिक सूकर हैं।
पहली बिक्री में ही लाखों की कमाई
ग्रेसी के फार्म से अब रायपुर सहित कई बाजारों में उन्नत नस्ल के पिगलेट्स की आपूर्ति शुरू हो चुकी है। हाल ही में उन्होंने 65 पिगलेट्स को 6,000 रुपये प्रति पिगलेट की दर से बेचकर 3.90 लाख रुपये की आय अर्जित की। यह सफलता बताती है कि वैज्ञानिक तरीके से किया गया सूकरपालन आज एक लाभदायक व्यवसाय बन चुका है।
बस्तर के युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा
ग्रेसी दुग्गा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी बड़े स्तर पर सफल उद्यमी बन सकते हैं। उनका आधुनिक सूकर फार्म आज न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल है, बल्कि बस्तर के युवाओं को कृषि और पशुपालन आधारित स्टार्टअप की ओर बढ़ने की नई प्रेरणा भी दे रहा है।
