जब सचिव ने पंचायत में जड़ा ताला… फिर जो हुआ, उसने पूरे जिले में मचा दी हलचल!

जब सचिव ने पंचायत में जड़ा ताला… फिर जो हुआ, उसने पूरे जिले में मचा दी हलचल!

महासमुंद में सचिव सस्पेंड, वहीं कोरबा में शिक्षकों ने संभाली कमान — एक तरफ लापरवाही की सजा, तो दूसरी ओर सेवा का समर्पण!

महासमुंद। जिले के ग्राम पंचायत बड़ेलोरम में उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब पंचायत सचिव मोहन पटेल ने कार्यालय में ताला जड़ दिया और चार महीने तक नदारद रहे। वरिष्ठ अधिकारियों की बार-बार की चेतावनी को अनदेखा करने और काम में लापरवाही बरतने के आरोप में जिला पंचायत महासमुंद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पटेल द्वारा पंचायत कार्यालय नियमित रूप से संचालित नहीं किया जा रहा था। जन्म-मृत्यु पंजीयन, पेंशन भुगतान, जाति-आय-निवास प्रमाण पत्र जैसे काम ठप पड़े थे। यहां तक कि ग्रामसभा का आयोजन भी नहीं हुआ और योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी लापरवाही सामने आई।
अब उनकी जगह सूरज साहू को नए सचिव के रूप में तैनात किया गया है।

 दूसरी ओर कोरबा से आई उम्मीद की किरण — मानदेय शिक्षकों ने थामी शिक्षा की डोर

कोरबा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और कलेक्टर अजीत वसंत के मार्गदर्शन में जिला खनिज न्यास (DMF) से 470 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।
इसमें 118 लेक्चरर, 109 शिक्षक, 243 सहायक शिक्षक और 310 भृत्य शामिल हैं।

अब कोरबा के पचरा, श्यांग, कटमोरगा जैसे सुदूर गांवों के विद्यालयों में पढ़ाई नियमित रूप से हो रही है।
शिक्षिका अभिलाषा सिंह तंवर और लक्ष्मी कुमारी ने बताया कि अब उन्हें शिक्षण के साथ आर्थिक स्थिरता भी मिली है।
वहीं विद्यार्थियों का कहना है कि अब सभी विषयों की क्लास समय पर होती है और कोई पीरियड खाली नहीं जाता।

विशेष पिछड़ी जनजातियों — पहाड़ी कोरवा और बिरहोर समाज के योग्य उम्मीदवारों को भी इस पहल में प्राथमिकता दी गई है, जिससे उन्हें शिक्षा और रोजगार दोनों का अवसर मिला है।

इस सत्र में अतिथि शिक्षकों के मानदेय में भी वृद्धि की गई है —

  • हायर सेकेंडरी व्याख्याता: ₹15,000

  • मिडिल स्कूल शिक्षक: ₹13,000

  • प्राथमिक शिक्षक: ₹11,000

  • भृत्य: ₹8,500