अब बच्चों की तस्करी पर नहीं चलेगी ढिलाई! हाईकोर्ट ने दिया 6 महीने में हर केस निपटाने का आदेश

अब बच्चों की तस्करी पर नहीं चलेगी ढिलाई! हाईकोर्ट ने दिया 6 महीने में हर केस निपटाने का आदेश

बाल तस्करी मामलों पर सख्त रुख: बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सभी जिलों को 6 माह में ट्रायल पूरा करने का निर्देश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बाल तस्करी (Child Trafficking) जैसे गंभीर अपराधों पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक ऐतिहासिक और सख्त निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि राज्य के सभी जिलों में लंबित बाल तस्करी से जुड़े मुकदमों को सर्कुलर जारी होने की तारीख से 6 महीने के भीतर अनिवार्य रूप से निपटाया जाए

इस आदेश को हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग के दायरे में रखा गया है, ताकि किसी भी देरी या लापरवाही की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

🔹 हाईकोर्ट के मुख्य निर्देश:

  • सभी जिला न्यायालय 6 माह के भीतर ट्रायल पूरा करें

  • यदि किसी केस में देरी होती है, तो उसका कारण स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड किया जाए

  • प्रत्येक मामले की प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाए।

  • जरुरत पड़ने पर मामलों की रोजाना सुनवाई सुनिश्चित की जाए।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इन मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि ये देश के भविष्य यानी बच्चों से जुड़े हुए हैं। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि कोर्ट के निर्देशों का पालन “जैसे लिखा गया है, वैसा ही किया जाना चाहिए।”

📊 सामाजिक पृष्ठभूमि:
बीते कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ में बाल तस्करी के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बच्चों को काम या अवैध गतिविधियों में झोंकने वाले गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार अक्सर धीमी रही है। ऐसे में हाईकोर्ट का यह निर्देश न्यायिक प्रक्रिया में तेजी और बच्चों की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।

👁️‍🗨️ विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करेगा और बाल तस्करी के मामलों में दोषियों को शीघ्र सज़ा दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम होगा।