सूरजपुर/पखांजूर। आधार कार्ड में मामूली सुधार कराने में जहां आम आदमी को महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं, वहीं कुछ रसूखदार लोग सिस्टम को ठेंगा दिखाकर ऐसे फर्जीवाड़े कर रहे हैं, जो आम इंसान के लिए नामुमकिन है। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर और उत्तर बस्तर से सामने आया यह मामला साबित करता है कि जब जमीन दलाल, अनपढ़ जनप्रतिनिधि और भ्रष्ट तंत्र आपस में मिल जाते हैं, तो एक जीवित व्यक्ति को भी “दो बार” मरा हुआ साबित कर सकते हैं।
यह खेल शुरू हुआ सूरजपुर जिले की लटोरी तहसील के संजयनगर ग्राम पंचायत से। यहां सरपंच सुमारी बाई (पति सुभाष मंडल) की मिलीभगत से एक ऐसे व्यक्ति— कन्हाई लाल दास— का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, जो कभी इस गांव में रहा ही नहीं। मामला खुलने पर सरपंच ने खुद को “अनपढ़” बताकर शपथ पत्र थमा दिया कि उन्हें धोखे में रखकर यह काम कराया गया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। इसकी दूसरी कड़ी उत्तर बस्तर के पखांजूर से जुड़ी, जहां धनंजय मंडल ने कन्हाई लाल के बेटे बताए गए सुधीर दास का भी अलग तारीख और जगह दिखाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। यानी एक ही शख्स को “दो जगह मारा” गया।
लटोरी तहसीलदार की जांच में खुलासा हुआ कि पटवारी की रिपोर्ट, पंचनामा और सचिव के कागज भी फर्जी थे। संजय नगर के निवासी महादेव चंद्र मित्रा ने आवेदन देकर इस घोटाले का पर्दाफाश किया और दस्तावेजों में फर्जी सील, हस्ताक्षर व मोहर का खुलासा किया। इसके बाद मामला राजस्व प्रकरण में दर्ज हुआ।
लेकिन बड़ा सवाल यह है— क्या यह फर्जीवाड़ा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित है या इसके तार बड़े व्यापारियों और राजनीतिक हस्तियों से भी जुड़े हैं? सूत्र बताते हैं कि अम्बिकापुर के कुछ नामचीन व्यापारी और नेताओं का इसमें अप्रत्यक्ष हाथ हो सकता है।
फिलहाल, तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर सरपंच सुमारी बाई, धनंजय मंडल और दिलीप दास पर धारा 420 और 120 (बी) के तहत कार्रवाई दर्ज हुई। बावजूद इसके, मुख्य आरोपी सरपंच आज भी बेखौफ घूम रही है और प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
इस पूरे मामले ने पंचायतों में महिला सशक्तिकरण की मंशा पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। महिलाओं को केवल मोहरा बनाकर भू-माफिया और रसूखदार लोग जमीन हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर रहे हैं। आम जनता जाति/निवास प्रमाण पत्र के लिए महीनों चक्कर काटती है, लेकिन रसूखदारों को राजस्व विभाग से “फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र” चुटकियों में मिल जाता है।
अब देखना है कि क्या प्रशासन इस भ्रष्ट तंत्र को जड़ से उखाड़ेगा, या यह मामला भी कागजों में दफन होकर रह जाएगा।
