रायपुर:छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की नई दिशा बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को जानकारी दी कि दंतेवाड़ा और बस्तर अंचल में चलाए जा रहे “लोन वर्राटू” और “पूना मारगेम” अभियानों के तहत बड़ी संख्या में नक्सलियों ने मुख्यधारा की ओर कदम बढ़ाए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कुल 71 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें से 30 नक्सली इनामी हैं। इन पर 50 हजार से लेकर 8 लाख रुपये तक कुल 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उन्होंने इसे बस्तर के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि यह सफलता सरकार की नवीन आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025 और नियद नेल्ला नार योजना की प्रभावशीलता का परिणाम है।
🔹 आत्मसमर्पित नक्सलियों को प्रोत्साहन
सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए हैं। इसके अलावा उन्हें शिक्षा, रोजगार, आवास और सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा,
“हमारा संकल्प है कि हर आत्मसमर्पित साथी समाज में सम्मानित रहे और विकास की धारा से जुड़ सके।”
🔹 नीतियों से बढ़ रहा भरोसा
मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवादी हिंसा के झूठे नारों से भटके हुए लोग अब सरकार की योजनाओं और कल्याणकारी नीतियों से प्रभावित होकर शांति की राह चुन रहे हैं। लोन वर्राटू अभियान (घर लौटो) और पूना मारगेम अभियान (नई राह) जैसे विशेष प्रयासों से माओवादी विचारधारा छोड़ने का माहौल बन रहा है।
उन्होंने बताया कि अब तक 1770 से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। यह आंकड़ा बस्तर में विश्वास और भरोसा तेजी से बढ़ने का संकेत देता है।
🔹 नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करना है। उन्होंने कहा,
“डबल इंजन की सरकार का संकल्प है कि हम विकास और विश्वास की राह पर बस्तर को आगे ले जाएंगे। हर आत्मसमर्पित नक्सली को सम्मानजनक पुनर्वास और सुरक्षित भविष्य मिलेगा।”
इतनी बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण को बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में बढ़ते कदम का प्रतीक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे सरकार के प्रयासों में सहयोग करें और बस्तर को हिंसा मुक्त, समृद्ध और शांतिपूर्ण क्षेत्र बनाने में साझेदारी निभाएं।
