उदयपुर। छत्तीसगढ़ के उदयपुर क्षेत्र में एक बार फिर मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति बन गई है। प्रेमनगर थाना क्षेत्र के मेंड्रा सतकोनापारा में बीती रात कोरिया जिले की ओर से पहुंचे करीब 12 हाथियों के दल ने ग्रामीण आलम नेटी के घर में घुसकर तोड़फोड़ कर दी। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है।
बताया जा रहा है कि हाथियों का यह दल हर साल सितंबर के आसपास इस क्षेत्र में पहुंचता है और नवंबर तक आसपास के जंगलों में विचरण करता है। इस दौरान फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचने के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी चुनौती बन जाती है।
पहले से 15 हाथियों की निगरानी में जुटा वन अमला
उदयपुर वन परिक्षेत्र में पहले से करीब 15 हाथियों का दल सुखरी, भंडार, बिच्छल घाटी, सायर, ससाकालो और लक्ष्मणगढ़ सहित आसपास के जंगलों में सक्रिय है। वन विभाग की टीम लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर रख रही है।
इसी बीच दूसरे दल के पहुंचने से वन विभाग के सामने चुनौती बढ़ गई है। ग्रामीणों को हाथियों से दूरी बनाए रखने और उनकी मौजूदगी की सूचना तत्काल वन विभाग को देने की सलाह दी जा रही है।
क्या सिकुड़ते जंगल और कॉरिडोर बढ़ा रहे संघर्ष?
मानव-हाथी संघर्ष के पीछे सिर्फ हाथियों का गांवों की ओर आना ही मुद्दा नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन और अन्य मानवीय गतिविधियों के विस्तार से हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में जंगल में भोजन और सुरक्षित रास्तों की कमी होने पर हाथियों के आबादी और खेतों की ओर आने की घटनाएं बढ़ती हैं।
स्थानीय स्तर पर पिछले वर्षों में हाथियों के हमलों में लोगों की मौत और फसलों-मकानों को नुकसान की कई घटनाओं का दावा किया जाता रहा है। वहीं उदयपुर वन परिक्षेत्र में हाथियों से हुए नुकसान से संबंधित आरटीआई से प्राप्त दस्तावेज भी सौ से अधिक पन्नों के बताए जा रहे हैं, जिनमें जनहानि और किसानों की फसलों को हुए नुकसान का विवरण दर्ज होने की बात कही गई है।
निगरानी के साथ स्थायी समाधान की जरूरत
हर साल हाथियों के पहुंचने के बाद वन विभाग निगरानी बढ़ाता है और ग्रामीणों को सतर्क करता है। लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच हाथी कॉरिडोर और प्राकृतिक रहवास क्षेत्रों को सुरक्षित रखने की जरूरत भी सामने आती है।
ग्रामीणों से अपील की गई है कि हाथियों के करीब न जाएं, उन्हें घेरने या उकसाने की कोशिश न करें और उनकी गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना दें।
उदयपुर में हाथियों की लगातार मौजूदगी अब सिर्फ वन्यजीव प्रबंधन का विषय नहीं रह गई है, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा, फसल और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास से जुड़ा बड़ा सवाल बनती जा रही है।
