Raipur News: भगवान शिव को लेकर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई। अदालत ने उन्हें 21 अगस्त 2026 तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
मामले को लेकर सियासी और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। वहीं पुलिस अब सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।
भाजपा पदाधिकारियों की शिकायत के बाद FIR
मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा पदाधिकारियों की ओर से अरुण पन्नालाल और हंसराज गोयल के खिलाफ सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली कथित पोस्ट का आरोप लगाया गया।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले को जांच में लिया और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।
गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में हुई पेशी
पुलिस ने अरुण पन्नालाल को गिरफ्तार करने के बाद सीजीएम आनंद सिंह की अदालत में पेश किया। अदालत में उनकी ओर से जमानत याचिका लगाई गई थी।
हालांकि, कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी और उन्हें 21 अगस्त तक जेल भेजने का आदेश दिया।
DCP ने कहा- तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर होगी कार्रवाई
DCP सेंट्रल तारकेश्वर पटेल ने बताया कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने संबंधी सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज की गई थी।
उन्होंने बताया कि मामले को विवेचना में लेते हुए साक्ष्य जुटाए गए हैं और अरुण पन्नालाल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। जांच में साइबर सेल की भी मदद ली जा रही है।
पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट और उससे जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। DCP के मुताबिक, विवेचना के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
हंसराज गोयल के खिलाफ भी FIR
इस मामले में हंसराज गोयल के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब कथित सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ी उनकी आईडी और अन्य जानकारी जुटा रही है।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब पुलिस की जांच पर टिकी नजर
फिलहाल अरुण पन्नालाल को कोर्ट के आदेश के बाद जेल भेज दिया गया है। वहीं पुलिस साइबर सेल की मदद से सोशल मीडिया पोस्ट और उससे जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।
अब नजर इस बात पर है कि जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई क्या होती है।
