“कपल अलग हों तो बढ़ जाता है मेरिटल रेप!” — शशि थरूर का बड़ा बयान, भारत के कानून पर उठाए गंभीर सवाल

कहा: पति को ‘छूट’ देना न्याय का मजाक, वैवाहिक बलात्कार के खिलाफ चाहिए सख्त कानून

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को एक कार्यक्रम में मेरिटल रेप (वैवाहिक बलात्कार) पर बेहद गंभीर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि वह हैरान हैं कि कड़े बलात्कार कानून होने के बावजूद भारत आज भी उन कुछ लोकतांत्रिक देशों में शामिल है, जहां पतियों द्वारा किया गया रेप “अपराध” नहीं माना जाता।

यह कार्यक्रम प्रभा खेतान फाउंडेशन और FICCI लेडीज ऑर्गनाइजेशन के सहयोग से आयोजित किया गया था।

🇮🇳 “भारत में पति को कानून से क्यों दी गई छूट?” — थरूर का सवाल

थरूर ने कहा:

 “भारत में बलात्कार विरोधी बहुत मजबूत कानून है, लेकिन पति के लिए एक बड़ा अपवाद भी है… और यह अपवाद असल में वैवाहिक बलात्कार ही है।”
 “पति को ऐसी छूट क्यों? क्या विवाह किसी महिला की सहमति का स्थायी लाइसेंस है?”

उन्होंने साफ कहा कि—
अगर पति पत्नी की इच्छा के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाता है, तो यह शादी नहीं, बल्कि हिंसा है।

 “पुरानी सोच के कारण नहीं बदल पा रहा कानून”

थरूर के अनुसार, यह कानून उस पुरानी सोच पर आधारित है कि—

“विवाह एक संस्कार है और इसके भीतर जो भी होता है उसे अपराध नहीं माना जा सकता।”

उन्होंने इसे गलत और खतरनाक मान्यता बताया।

 “महिला मंत्रियों ने भी इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया”

थरूर ने दुख जताया कि—
 महिलाओं को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी संभालने वाली महिला मंत्रियों ने भी अब तक इस विषय पर कोई ठोस पहल नहीं की।
 यह भी न्याय के साथ अन्याय है।

 “मेरिटल रेप वहां ज्यादा होता है, जहां कपल अलग हो चुका हो”—थरूर

थरूर ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए बेहद चौंकाने वाला दावा किया—

“सबसे ज़्यादा वैवाहिक बलात्कार उन मामलों में होता है, जहां कपल अलग रह रहा होता है लेकिन कानूनी रूप से तलाक नहीं हुआ होता।”

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में:

  • पति जब चाहे तब लौट आता है,

  • पत्नी पर जबरन संबंध बनाता है,

  • और कुछ नहीं किया जा सकता क्योंकि कानून अब भी उन्हें पति-पत्नी ही मानता है।

थरूर ने इसे न्याय का मजाक बताया।

 “भारत को घरेलू बलात्कार के खिलाफ सख्त कानून तुरंत चाहिए”

थरूर ने जोर देते हुए कहा कि—
 भारत को वैवाहिक बलात्कार और घरेलू रेप के खिलाफ एक स्पष्ट, कठोर और आधुनिक कानून की तुरंत जरूरत है।
 और जो ‘छूट’ वर्तमान कानून देता है, उसे खत्म करना समय की मांग है।