दो साल पहले ही दी थी जानकारी!  राहुल गांधी पर चुनाव आयोग का करारा पलटवार

राहुल गांधी के आरोपों पर आयोग का जवाब—“वोटर लिस्ट से नाम डिलीट करने का आरोप पूरी तरह झूठा और आधारहीन”

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ताज़ा आरोपों पर चुनाव आयोग ने जोरदार पलटवार किया है। राहुल ने जिस जानकारी की मांग गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में की थी, आयोग ने उसका पूरा ब्योरा तिथि सहित सामने रख दिया।

आयोग ने साफ किया कि यह जानकारी 6 सितंबर 2023 को ही पुलिस को सौंप दी गई थी। इसमें नाम, मोबाइल नंबर, एप्लीकेशन का माध्यम, लॉगिन डिटेल, IP एड्रेस से लेकर आवेदन की तारीख और यूज़र आईडी तक का पूरा रिकॉर्ड शामिल था।

EC ने खुद कराया था FIR दर्ज

आयोग ने बताया कि इस गड़बड़ी पर उसने 21 फरवरी 2023 को ही FIR दर्ज कराई थी। यानी जांच का सिलसिला बहुत पहले से चल रहा है।

राहुल गांधी का आरोप झूठा?

EC ने कहा कि किसी का नाम मतदाता सूची से न तो ऑनलाइन डिलीट हो सकता है और न ही जोड़ा जा सकता है। यह अधिकार केवल उपजिलाधिकारी स्तर के मतदाता पंजीयन अधिकारी (ERO) के पास है। वह भी आवेदन की जांच और नोटिस प्रक्रिया के बाद ही फैसला करता है।

2018 और 2023 का चुनावी संदर्भ

आयोग ने सवाल उठाया—अगर वोटर लिस्ट से नाम डिलीट कराए जा रहे थे तो 2018 में बीजेपी की जीत और 2023 में कांग्रेस की जीत कैसे हुई?

ऑनलाइन संदिग्ध आवेदन

कर्नाटक चुनाव अधिकारी ने जानकारी साझा की कि दिसंबर 2022 में एनवीएसपी, गरुड़ और वीएचए एप के जरिए 6018 आवेदन आए थे। इनमें से सिर्फ 24 सही पाए गए और बाकी संदिग्ध होने पर रद्द कर दिए गए।

मोबाइल नंबर भी आयोग ने ही दिया था

राहुल गांधी ने जिस मोबाइल नंबर को लेकर सवाल खड़े किए, उस पर भी आयोग ने स्पष्ट कर दिया कि यह जानकारी खुद आयोग ने ही राज्य पुलिस को दी थी।