बिहार में सियासी महाभारत का शंखनाद! PM के बाद शाह की एंट्री… क्या 2025 में बीजेपी का ‘चाणक्य’ पलटेगा सत्ता का खेल?
पटना एयरपोर्ट से शुरू हुई हलचल, डेहरी की बैठक में फूटा आत्ममंथन… अमित शाह की बूथ-स्तर की रणनीति क्या महागठबंधन की जातीय पकड़ तोड़ पाएगी?
पटना (बिहार): 2025 विधानसभा चुनाव से पहले बिहार की सियासत गरमा चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के रणनीतिकार अमित शाह ने बिहार में एंट्री कर दी है। यह सिर्फ़ दौरा नहीं, बल्कि उस सियासी महाभारत की प्रस्तावना है, जिसमें जीत का मतलब सत्ता से कहीं ज़्यादा गहरा है।
बुधवार रात पटना एयरपोर्ट पर हुए जोरदार स्वागत और उसके बाद डेहरी के जक्खी बिगहा स्पोर्ट्स क्लब में हुई बैठक ने संकेत दे दिया कि बीजेपी पूरे दमखम के साथ मैदान में उतर चुकी है। शाह ने साफ़ कहा— “हर बूथ पर मज़बूत सिपाही, हर गली में भगवा परचम।” यह नारा अब पार्टी की चुनावी रणनीति का आधार बन चुका है।
बीजेपी ने बिहार को पाँच ज़ोन में बाँटकर तैयारी शुरू कर दी है और शाह खुद हर ज़ोन में कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे। यह वही मॉडल है, जिसने 2014 और 2019 में बीजेपी को राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। सवाल यह है कि क्या यह रणनीति बिहार की जटिल जातीय गणित पर भी भारी पड़ पाएगी?
महागठबंधन के भीतर अंतर्विरोध भले ही हैं, लेकिन उसकी ज़मीनी पकड़ अभी भी मज़बूत है। वहीं, नीतीश कुमार की थकती सियासत और युवा मतदाताओं का बदला रुझान चुनाव को और दिलचस्प बना रहा है।
27 सितंबर को शाह की अगली यात्रा से पहले ही बिहार में सियासी तापमान उबाल पर है। यह साफ़ दिख रहा है कि 2025 का चुनाव सिर्फ़ सीटों की गिनती नहीं, बल्कि “आर या पार की लड़ाई” होगी—जहां बीजेपी का लक्ष्य सत्ता से ज़्यादा वैचारिक वर्चस्व की जंग जीतना है।
