रायपुर, 25 अगस्त 2026: आज के समय में जब खाने में पोषक तत्वों की कमी और रसायनयुक्त खाद्य पदार्थों को लेकर चिंता बढ़ रही है, ऐसे में घर के आसपास ही ताजी और पौष्टिक सब्जियां उगाने की पहल बेहद अहम हो जाती है। इसी उद्देश्य से आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (एनआईबीएसएम), रायपुर की ओर से किसानों के लिए ‘पोषण वाटिका’ पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में बरोंदा, मुर्रा, बेलटुकरी, देवगांव, कुर्रा और कथुरड गांवों के 62 किसानों ने हिस्सा लिया, जिनमें 10 महिला किसान भी शामिल रहीं। किसानों को घरेलू पोषण सुरक्षा, आहार विविधता और सुरक्षित खाद्य उत्पादन से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी गई।
घर की ताजी सब्जियां परिवार की सेहत के लिए जरूरी
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने किया। उन्होंने पोषण वाटिका के महत्व को समझाते हुए कहा कि घर पर ताजी, पौष्टिक और रसायन मुक्त सब्जियों व फलों की उपलब्धता परिवार के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के पास पर्याप्त जमीन नहीं है, वे आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी पोषण वाटिका विकसित कर सकते हैं। इससे न सिर्फ परिवार को पौष्टिक भोजन मिलेगा, बल्कि समुदाय स्तर पर कुपोषण से लड़ने में भी मदद मिलेगी।
बारिश कम हो तो ऐसे बचाएं पौधे, ज्यादा पानी में अपनाएं ये तरीका
संयुक्त निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पंकज शर्मा ने किसानों को स्थानीय जलवायु के अनुसार पोषण वाटिका तैयार करने और उसकी देखभाल के व्यावहारिक तरीके बताए।
उन्होंने कम बारिश की स्थिति में उचित आकार के गड्ढे तैयार कर उसमें अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाकर फलदार पौधे लगाने की सलाह दी। वहीं जलभराव वाले क्षेत्रों में उचित जल निकासी की व्यवस्था करने और ज्यादा नमी वाले स्थानों पर सब्जियां उगाने के लिए रेज्ड बेड यानी ऊंची क्यारियां बनाने की जानकारी दी।
किसानों को अनावश्यक रासायनिक कीटनाशकों से बचने और पारंपरिक व पर्यावरण-अनुकूल जैविक उपायों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया।
मुफ्त में मिले 18 तरह की सब्जियों के बीज
प्रशिक्षण के बाद किसानों को पोषण वाटिका शुरू करने के लिए उन्नत किस्म के अमरूद और नींबू के पौधे वितरित किए गए।
इसके साथ ही 18 प्रकार की सब्जियों के बीज भी निशुल्क दिए गए। इनमें पालक, धनिया, मेथी, भिंडी, लौकी, तोरी, मूली समेत कई सब्जियां शामिल हैं।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को अपने घर और आसपास पौष्टिक खाद्य पदार्थ उगाने के लिए प्रोत्साहित करना और परिवारों में आहार विविधता को बढ़ावा देना है।
महिला किसानों ने भी बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
कार्यक्रम में 10 महिला किसानों समेत कुल 62 किसानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान स्थानीय स्तर पर पोषण वाटिका को बढ़ावा देने और सुरक्षित खाद्य उत्पादन के महत्व पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में स्थानीय सरपंच कंचन गायकवाड़ और संतोष कुर्रे विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल समन्वय प्रधान वैज्ञानिक डॉ. के. सी. शर्मा ने किया।
ICAR-NIBSM की इस पहल से किसानों को कम लागत में अपने परिवार के लिए ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ जैविक एवं पर्यावरण-अनुकूल खेती की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
