FSSAI का बड़ा एक्शन! 150 से ज्यादा नोटिस, 50 हजार प्रोडक्ट जब्त, बड़े ब्रांड्स पर कसा शिकंजा

 

दिल्ली: देश के फूड सेफ्टी रेगुलेटर FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) ने साल 2026 में खाद्य और पेय पदार्थों से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर सख्ती तेज कर दी है। मई से अगस्त के बीच अलग-अलग मामलों में बड़ी कंपनियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और फूड सर्विस चेन के खिलाफ कार्रवाई सामने आई है।

22 अगस्त को FSSAI ने बताया कि Nestlé India, PepsiCo, Coca-Cola India, Abbott India, Red Bull, Danone India, Monster Energy, Hell Energy, Mondelez India, Diageo, Pernod Ricard, Ferrero India और Kenvue समेत कई कंपनियों को मिलाकर हाल के महीनों में 150 से ज्यादा नोटिस जारी किए गए हैं।

इन नोटिसों में मुख्य तौर पर भ्रामक विज्ञापन, गलत दावे और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को आधार बनाया गया है। इसके अलावा कुछ मामलों में बड़ी मात्रा में खाद्य उत्पाद जब्त किए गए और FIR तक दर्ज हुई।

1. अल्कलाइन वाटर में मिला ऐसा पदार्थ, जिसे लेकर मचा हड़कंप

गुजरात के वडोदरा के सावली इलाके में FSSAI के वेस्टर्न रीजनल ऑफिस ने एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से करीब 31.61 लाख रुपये का अल्कलाइन वाटर स्टॉक जब्त किया।

लैब जांच में पानी में फुल्विक एसिड पाया गया, जो पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर में अनुमत सामग्री नहीं है। इसके अलावा पैकेजिंग पर प्रोडक्ट का नाम और सामग्री की जानकारी भी नहीं मिली। बोतलों के अंदर काले कण पाए जाने की बात भी सामने आई।

यह कार्रवाई एक उपभोक्ता की शिकायत के बाद की गई।

2. दिल्ली में 50 हजार से ज्यादा फूड पैक जब्त, FIR भी दर्ज

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में FSSAI की कार्रवाई में कथित फर्जी रीलेबलिंग का मामला सामने आया।

वेस्टएंड कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड पर कार्रवाई के दौरान आरोप है कि खाद्य उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और बैच नंबर मिटाकर दोबारा प्रिंट किए जा रहे थे।

मौके से 50 हजार से ज्यादा संदिग्ध खाद्य पैक, केमिकल सॉल्वेंट और प्रिंटिंग मशीनें बरामद की गईं। मामले में ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज की गई।

3. ‘एनर्जी ड्रिंक’ नाम पर भी FSSAI की सख्ती

FSSAI ने Sting, Red Bull, Monster Beverage, Campa Energy और Hell Energy जैसी कंपनियों को भी नोटिस जारी किए।

रेगुलेटर का कहना है कि भारत में ‘एनर्जी ड्रिंक’ नाम की कोई आधिकारिक फूड कैटेगरी नहीं है। इसके अलावा ‘शरीर और दिमाग को ऊर्जा देने’ तथा ‘सामान्य कमजोरी में मदद’ जैसे दावों को भी भ्रामक माना गया।

कंपनियों को लेबल में जरूरी बदलाव करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है।

4. ‘100%’, ‘हेल्दी’ और ‘नेचुरल’ जैसे दावों पर सवाल

FSSAI ने खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में इस्तेमाल किए जा रहे ‘Healthy’, ‘Natural’, ‘Fresh’, ‘100%’ और ‘No Added Sugar’ जैसे दावों को लेकर भी सख्ती दिखाई है।

रेगुलेटर की कार्रवाई के बाद Amway India, Emami और Bonn Biscuits समेत छह कंपनियों ने अपने उत्पादों से ऐसे दावों को हटाया या उनमें बदलाव किया।

5. 150 से ज्यादा नोटिस, बड़े ब्रांड्स पर नजर

FSSAI के मुताबिक हाल के महीनों में 150 से ज्यादा नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें Nestlé India, PepsiCo, Coca-Cola India, Abbott India, Red Bull, Danone India, Monster Energy, Hell Energy, Mondelez India, Diageo, Pernod Ricard, Ferrero India और Kenvue जैसी कंपनियां शामिल हैं।

नोटिस मुख्य तौर पर भ्रामक विज्ञापन, गलत दावे और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन से जुड़े हैं।

6. Amazon और Flipkart को भी नोटिस

FSSAI की कार्रवाई सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों तक सीमित नहीं रही। अगस्त में Amazon और Flipkart जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को भी 12 नोटिस जारी किए गए।

इसके अलावा Amazon के एक वेयरहाउस का लाइसेंस भी रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है।

7. KFC से Domino’s तक फूड चेन पर कार्रवाई

फूड सर्विस सेक्टर में भी FSSAI ने कार्रवाई की है। अगस्त में KFC, McDonald’s, Pizza Hut, Domino’s और Costa Coffee जैसी फूड सर्विस चेन को 30 से ज्यादा नोटिस भेजे गए।

इन कार्रवाइयों के बीच Domino’s के पांच आउटलेट्स के लाइसेंस सस्पेंड किए गए।

आखिर कंपनियां कौन-से नियम तोड़ रही हैं?

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स नियमों के तहत किसी भी खाद्य उत्पाद पर किया गया दावा सटीक, स्पष्ट, आसानी से समझ में आने वाला और गैर-भ्रामक होना चाहिए।

इसका मतलब है कि कंपनियां बिना पर्याप्त वैज्ञानिक आधार के अपने उत्पाद को ‘हेल्दी’, ‘100% प्योर’, ‘नेचुरल’ या किसी खास स्वास्थ्य लाभ वाला बताकर प्रचार नहीं कर सकतीं।

इसी तरह लेबल पर प्रोडक्ट का नाम, सामग्री (Ingredients), मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और अन्य जरूरी जानकारी सही तरीके से देना अनिवार्य है।

किसी उत्पाद की तारीख, बैच नंबर या अन्य जरूरी जानकारी को मिटाकर दोबारा प्रिंट करना गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है। दिल्ली के मामले में इसी तरह की कथित रीलेबलिंग के चलते आपराधिक कार्रवाई भी हुई।

गंभीर उल्लंघन पर लाइसेंस भी हो सकता है रद्द

Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठान का लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है। मामले की गंभीरता के अनुसार आपराधिक कार्रवाई का भी प्रावधान है।

यानी अब सिर्फ खाने की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि पैकेट पर लिखी जानकारी और विज्ञापन में किए गए दावे भी FSSAI की निगरानी में हैं।

आगे और बढ़ सकती है निगरानी

मई से अगस्त 2026 तक सामने आई इन कार्रवाइयों से संकेत मिलता है कि FSSAI ने खाद्य उत्पादों की लेबलिंग, विज्ञापन दावों, ई-कॉमर्स सप्लाई चेन और फूड सर्विस आउटलेट्स पर निगरानी बढ़ा दी है।

मामले में सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता भी सामने आई है। अदालत ने शुगर, नमक और सैचुरेटेड फैट की अधिक मात्रा वाले खाद्य उत्पादों पर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल को लेकर हो रही देरी पर केंद्र सरकार और FSSAI से सवाल किए हैं।

वहीं ‘एनर्जी ड्रिंक’ की लेबलिंग को लेकर कंपनियां भी FSSAI के फैसले पर आपत्ति जता रही हैं। उनका तर्क है कि ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द हटाने से उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा हो सकता है और स्थापित ब्रांड प्रभावित हो सकते हैं।

फिलहाल FSSAI अपने रुख पर कायम है। ऐसे में आने वाले महीनों में फूड लेबलिंग, विज्ञापन दावों और ऑनलाइन बिकने वाले खाद्य उत्पादों की जांच और सख्त होने की संभावना है।