चांदी के नाम पर क्या बांट दिया गया? मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में मंगलसूत्र को लेकर बड़ा बवाल

एमसीबी। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत नवविवाहिताओं को वितरित किए गए मंगलसूत्र को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिन मंगलसूत्रों को विवाह समारोह के दौरान चांदी का बताकर दिया गया था, उन्हें लेकर अब लाभार्थियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। महिलाओं का दावा है कि कुछ ही महीनों में मंगलसूत्र का रंग बदलकर काला पड़ गया, जिसके बाद इसकी गुणवत्ता पर संदेह गहरा गया है।

जानकारी के अनुसार 10 फरवरी को रतनपुर में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के सामूहिक विवाह समारोह में 189 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया था। इस दौरान शासन की ओर से नवविवाहित जोड़ों को विभिन्न उपहार सामग्री प्रदान की गई थी, जिनमें मंगलसूत्र भी शामिल था। अब इसी मंगलसूत्र को लेकर कई महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई है।

लाभार्थियों का कहना है कि विवाह के समय उन्हें बताया गया था कि मंगलसूत्र चांदी का है, लेकिन कुछ समय बाद ही उसका रंग बदलने लगा। महिलाओं का आरोप है कि जब उन्होंने इसकी जांच कराई तो उन्हें इसकी गुणवत्ता को लेकर संदेहास्पद जानकारी मिली। इसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया और योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठने लगे।

कुछ महिलाओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि उपहार सामग्री के बजाय उन्हें निर्धारित राशि उपलब्ध करा दी जाती, तो वे अपनी पसंद और भरोसेमंद गुणवत्ता का मंगलसूत्र खरीद सकती थीं। उनका कहना है कि सरकारी योजना के तहत वितरित सामग्री में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए था।

मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही और कथित अनियमितताओं के कारण योजना की लाभार्थी बेटियों के साथ अन्याय हुआ है। कांग्रेस नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

वहीं प्रशासन ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल इस विवाद के सामने आने के बाद लाभार्थियों और स्थानीय लोगों की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी शिकायतें दोबारा सामने न आएं।