सिंहदेव पट्टे की 2.16 हेक्टेयर जमीन पर बड़ा फर्जीवाड़ा? PVTG पण्डो परिवार ने लगाया कब्जे का आरोप, 3 टुकड़ों में बांटकर पट्टा बनाने की शिकायत

अम्बिकापुर। सरगुजा संभाग के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) पण्डो परिवार की जमीन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम ओरंगा के पण्डो परिवारों ने कमिश्नर सरगुजा संभाग और कलेक्टर बलरामपुर को शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि सिंहदेव प्रकरण 1975-76 के तहत उनके पूर्वजों को आवंटित 2.16 हेक्टेयर भूमि को कथित रूप से धोखाधड़ी और कूटरचना के जरिए हड़प लिया गया।

पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि जमीन को तीन हिस्सों में विभाजित कर अवैध पट्टे तैयार किए गए और वर्षों से उन्हें उनकी पुश्तैनी भूमि से वंचित रखा जा रहा है।

सिंहदेव प्रकरण की जमीन पर विवाद

आवेदन के अनुसार ग्राम ओरंगा मोड़ स्थित उभका ढोढा और बभनी पहाड़ क्षेत्र में स्थित पुराना खसरा नंबर 219/5, नया खसरा नंबर 388, रकबा 2.16 हेक्टेयर भूमि स्वर्गीय जानकी पण्डो पिता रूपसाय पण्डो को सिंहदेव प्रकरण 1975-76 के तहत व्यवस्थापन पट्टे में प्राप्त हुई थी।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यह भूमि उनके परिवार की खूटा-काटा पुश्तैनी काबिज काश्त भूमि है और दशकों से परिवार इसके उपयोग और खेती-किसानी से जुड़ा रहा है।

तीन हिस्सों में बांटने का आरोप

पीड़ित परिवार का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने खसरा नंबर 388 को कथित रूप से तीन भागों में विभाजित करवा दिया।

  • खसरा नंबर 388/1 – 0.4000 हेक्टेयर
  • खसरा नंबर 388/2 – 0.0200 हेक्टेयर
  • खसरा नंबर 388/3 – 0.4500 हेक्टेयर

परिवार का कहना है कि इसके बाद अदला-बदली के नाम पर उन्हें दूसरी भूमि देने का प्रस्ताव दिया गया और इसी प्रक्रिया के दौरान मूल भूमि पर कब्जा कर लिया गया।

रेहन को बिक्री में बदलने का आरोप

शिकायत में कहा गया है कि आर्थिक जरूरत के समय परिवार ने जमीन को रेहन रखने की बात की थी। आरोप है कि इसी दौरान कथित रूप से केवल एक हिस्से की रजिस्ट्री कराई गई और बाद में पूरी भूमि को बिक्री बताकर दावा किया जाने लगा।

परिवार का कहना है कि समय-समय पर रेहन राशि बढ़ती गई, लेकिन जब रकम लौटाकर जमीन वापस लेने की बात की गई तो अलग-अलग दावे किए जाने लगे। कभी कहा गया कि जमीन पूर्वजों ने बेच दी थी, तो कभी किसी अन्य परिजन द्वारा बिक्री किए जाने की बात कही गई।

ग्राम पंचायत बैठक में खुलासा होने का दावा

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि 5 जून 2026 को ग्राम पंचायत ओरंगा में आयोजित बैठक के दौरान कथित रूप से यह स्वीकार किया गया कि भूमि अब भी रेहन की स्थिति में है। परिवार का आरोप है कि इससे पहले वर्षों तक जमीन को स्थायी बिक्री बताकर उन्हें गुमराह किया जाता रहा।

PVTG परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

पण्डो परिवार का कहना है कि वे विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग से हैं और आर्थिक व सामाजिक रूप से कमजोर होने के कारण वर्षों तक न्याय नहीं पा सके। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों ने राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया।

प्रशासन से क्या मांगी कार्रवाई?

पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि—

  • खसरा नंबर 388/1, 388/2 और 388/3 की राजस्व एवं कानूनी जांच कराई जाए।
  • कथित रूप से हुई अवैध रजिस्ट्री और पट्टों को निरस्त किया जाए।
  • अनुसूचित जनजाति की जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
  • या तो अदला-बदली में बताई गई भूमि का वैध हस्तांतरण किया जाए अथवा मूल भूमि वापस दिलाई जाए।
  • संबंधित राजस्व अभिलेखों और पट्टा प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई

मामले में लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन इनकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल शिकायत प्रशासन के पास पहुंच चुकी है और अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राजस्व और प्रशासनिक अधिकारी इस विवादित भूमि मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।