परिवार में पहले से नौकरी, फिर भी मिलेगी सरकारी नियुक्ति? हाईकोर्ट के फैसले ने बदल दी तस्वीर

बिलासपुर। अनुकंपा नियुक्ति को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो हजारों परिवारों के लिए राहत की बड़ी उम्मीद बन सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि मृत कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, तो केवल इसी आधार पर दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। नियुक्ति पर फैसला लेने से पहले परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति और वित्तीय संकट का आकलन करना जरूरी है।

हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति योजना का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को कठिन परिस्थितियों में तत्काल आर्थिक सहारा देना है। ऐसे में केवल तकनीकी कारणों का हवाला देकर आवेदन खारिज करना योजना की मानवीय भावना के खिलाफ है।

पिता की मौत के बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई

मामला अंबिकापुर नगर निगम में कार्यरत एक सफाई कर्मचारी से जुड़ा है। सेवा के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। उनके निधन के बाद परिवार में पत्नी, तीन पुत्र और एक पुत्री रह गए, जो उनकी आय पर निर्भर थे। परिवार के एक सदस्य ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन अधिकारियों ने यह कहते हुए आवेदन निरस्त कर दिया कि मृतक की पत्नी पहले से सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं।

इस फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के बाद एकल पीठ ने आवेदन खारिज करने के आदेश को रद्द करते हुए नगर निगम को अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया था।

नगर निगम ने दी नीति की दलील

एकल पीठ के आदेश के खिलाफ नगर निगम आयुक्त ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। सुनवाई के दौरान निगम की ओर से तर्क दिया गया कि 14 जून 2013 की राज्य सरकार की नीति के मुताबिक यदि परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।

वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उसकी मां का वेतन बेहद कम है और इतने बड़े परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। साथ ही अधिकारियों ने परिवार की आर्थिक स्थिति का वास्तविक आकलन किए बिना ही आवेदन खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट ने सुनाई अहम टिप्पणी

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि परिवार अपना मुख्य कमाने वाला सदस्य खो चुका था। ऐसे में केवल यह तथ्य कि परिवार का एक सदस्य कम वेतन वाली नौकरी कर रहा है, यह साबित नहीं करता कि परिवार आर्थिक संकट से बाहर निकल चुका है।

अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति भले ही मौलिक अधिकार नहीं है, लेकिन यह एक कल्याणकारी और मानवीय योजना है, जिसका उद्देश्य संकट में फंसे परिवारों को राहत पहुंचाना है। इसलिए अधिकारियों को ऐसे मामलों में व्यावहारिक और उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

अपील खारिज, परिवार को राहत बरकरार

अंततः हाईकोर्ट ने नगर निगम की अपील खारिज कर दी और एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा। इस फैसले के साथ मृत कर्मचारी के परिवार को बड़ी राहत मिली है। साथ ही अदालत का यह निर्णय भविष्य में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल भी माना जा रहा है।