धान न बेच पाने पर किसानों में हाहाकार! टोकन बंद, खुदकुशी की नौबत, सरकार पर सियासी हमला

रायपुर:
छत्तीसगढ़ में इस साल की धान खरीदी प्रक्रिया किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है। प्रदेश के कई जिलों में ऑनलाइन टोकन बंद होने से किसान परेशान हैं। सवाल उठता है कि जब 31 जनवरी तक समय है और सरकार कह रही है कि तय रकबे का पूरा धान खरीदा जाएगा, तो आखिर अब बचा हुआ धान कैसे बेचा जाएगा?

टोकन बंद, नाराजगी और हंगामा

15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी प्रक्रिया के तहत कई किसानों ने रजिस्ट्रेशन करवा लिया और 3-टोकन प्रणाली के तहत उनके पास कम से कम एक टोकन अभी भी बचा था। लेकिन अचानक टोकन बंद हो जाने से किसान स्तब्ध हैं।

खाद्य विभाग के MD जितेंद्र शुक्ला का दावा है कि शेष किसान ऑफलाइन टोकन कटवा कर धान बेच सकते हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। रायपुर समेत कई जिलों की समितियों में किसानों ने शिकायत की कि ऑफलाइन टोकन भी बंद कर दिए गए हैं

कोरबा के हरदीबाज़ार थाना क्षेत्र में एक किसान ने टोकन न मिलने की निराशा में कीटनाशक पी लिया, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई।

सियासी आरोप-प्रत्यारोप

किसानों की परेशानी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सीधे-सीधे किसानों से धोखा करने का आरोप लगाया है। वहीं सत्ता पक्ष का दावा है कि सरकार का संकल्प है कि हर किसान का पूरा धान खरीदा जाएगा।

दावा और सफाई अपनी जगह, लेकिन किसानों का मानना है कि टोकन बंद होने से उन्हें बेचने का मौका ही नहीं मिल रहा। इस पर जनता और कृषि समुदाय में चिंता और गुस्सा बढ़ता जा रहा है।